पॉलीथिन बंद करो
शर्म करो शर्म करो,
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।
चीख रही है धरती,
करके करुण पुकार।
मत कर ऐ मानव,
तू मुझ पर अत्याचार।
पॉलीथिन कितनी जहरीली,
इससे होतीं कई बीमारी।
त्याग नहीं करते क्यों इसका,
ऐसी भी क्या लाचारी।
कुछ तो अच्छी बातों पर,
तुम सब गौर करो।।
शर्म करो शर्म करो,
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।।
पॉलीथिन को बना लिया,
क्यों जीवन का हिस्सा।
खत्म होगा आखिर कब,
प्रदूषण का किस्सा।
वक्त अभी है संभल तो जाओ,
आगे फिर पछताओगे।
प्रकृति के कहर से,
कभी न बख्शे जाओगे।
बढ़ाओ कदम आगे आओ,
मिलकर संकल्प करो।।
शर्म करो शर्म करो,
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।।
पॉलीथिन की जगह,
कपड़े का बैग इस्तेमाल करो।
हरे भरे पौधों से,
धरती को मालामाल करो।
प्लास्टिक की वस्तुएँ,
कम उपयोग में लाओ।
अपनी इस धरती को,
फिर से स्वर्ग बनाओ।
स्वच्छ भारत अभियान को,
मिलकर सफल करो।।
शर्म करो शर्म करो,
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।।
रचयिता
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।
चीख रही है धरती,
करके करुण पुकार।
मत कर ऐ मानव,
तू मुझ पर अत्याचार।
पॉलीथिन कितनी जहरीली,
इससे होतीं कई बीमारी।
त्याग नहीं करते क्यों इसका,
ऐसी भी क्या लाचारी।
कुछ तो अच्छी बातों पर,
तुम सब गौर करो।।
शर्म करो शर्म करो,
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।।
पॉलीथिन को बना लिया,
क्यों जीवन का हिस्सा।
खत्म होगा आखिर कब,
प्रदूषण का किस्सा।
वक्त अभी है संभल तो जाओ,
आगे फिर पछताओगे।
प्रकृति के कहर से,
कभी न बख्शे जाओगे।
बढ़ाओ कदम आगे आओ,
मिलकर संकल्प करो।।
शर्म करो शर्म करो,
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।।
पॉलीथिन की जगह,
कपड़े का बैग इस्तेमाल करो।
हरे भरे पौधों से,
धरती को मालामाल करो।
प्लास्टिक की वस्तुएँ,
कम उपयोग में लाओ।
अपनी इस धरती को,
फिर से स्वर्ग बनाओ।
स्वच्छ भारत अभियान को,
मिलकर सफल करो।।
शर्म करो शर्म करो,
कुछ तो शर्म करो।
बंद करो बंद करो,
पॉलीथिन बंद करो।।
रचयिता
आरती साहू,
सहायक अध्यापक,
प्रा0 वि0 उमरापुर तालुक,
विकास खण्ड-बनीकोडर,

शानदार
ReplyDeleteशानदार