तू कर्म कर

मन शालीनता सा सिमटा हुआ
दर्द के आगोश में लिपटा हुआ
यही मन फिर मुझसे ही कहता है
तू कर्म कर तू कर्म कर

रुकना ना तू एक पल के लिए
असफलता से विछोह किए
हर राह में विपत्ति आती है
लेकिन वो मंजिल ना रोक पाती है

तू सीख यहाँ सीखता ही रह
तू कर्म कर तू कर्म कर

रुक ना रास्ते में बिना मंजिल को पाये
अपनी मंजिल तू कर्मों से खुद ही बनाये
थोड़ा अँधेरा होगा तेरी राहों में
सफलता का दीपक तू खुद ही जलाये

लेकर प्रेरणा तू आगे बढ़
तू कर्म कर तू कर्म कर

रचयिता
दीपक कुमार यादव,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मासाडीह,
विकास खण्ड-महसी,
जनपद-बहराइच।

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