नमामि गंगे

निर्मल पानी की इक बूँद,
बादलों की गोद से निकली।

इठलाती, बलखाती, झूमती,
अल्हड़ बाला सी मनचली।।

शंकर का तुझमें है श्रावण,
नदियों की कलकल तू ही तू।

धरती का जो करती श्रंगार ,
तू भूमि की कोमल कली।।

निर्मल पानी..................

वेदों में जो वरूण देव,
इन्द्र की तू  ही संगनि।

कठिन सफ़र तू करती तय,
कितनी लंबी है तेरी जीवनी॥

निर्मल पानी ..................

तेरे साथ से  जीवन मिलता ,
हम सबके लिए तू  है वंदनी।

बहना इस धरा पे हरदम,
गंगा माँ सी तरंगिनी।।

निर्मल पानी....................

है सबका संकल्प ये,
रखेंगे हमेशा निर्मल तुझे।

धुलती रहना पापों को,
तू है हम सबकी पूजनीय॥

निर्मल पानी ................

रचयिता 
गीता यादव,
प्रधानाध्यपिका,
प्राथमिक विद्यालय मुरारपुर,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फ़तेहपुर।

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