अमृतधारा

जननी देती शिशु को नव जीवन
अर्पण करके अपना तन - मन
भूल के अपना साज - श्रृंगार
करती शिशु को वो दुलार
काम - काज सब पीछे छोड़े
शिशु को अपने आँचल में ओढ़े
हर मानव को है ये ज्ञान
माँ की ममता है सबसे महान
   नौ माह कोख में पालन करती
   जननी रूप वो धारण करती
   जब करता शिशु स्तनपान
   तन मन उसका होता बलवान
देता शिशु को वो नवजीवन
विकसित होता उसका तन मन
वह औषधि वह अमृतधारा
सामने इसके डॉक्टर भी हारा
   शिशु इससे सब पोषण पाता
   बाह्य दूध तो रोग बढ़ाता
  इस अमृत से शिशु संजीवनी पाता
शिशु की प्रतिरोधक क्षमता ये बढ़ाता
  आओ हम मिल संकल्प कराएँगे
  हर माँ को प्रण ये दिलाएँगे
  शिशु को स्तनपान कराना है
  नव पीढ़ी को सुदृढ़ बनाना है।

रचयिता
अर्चना अरोड़ा,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बरेठर खुर्द,
विकास खण्ड-खजुहा,
जनपद-फ़तेहपुर।


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