अंग्रेजी
प्राथमिक विद्यालयों में भी अब
चर्चा 'अंग्रेजी' की होने लगी।
कई विद्यालय खुल गए
अंग्रेजी माध्यम में किताबें होने लगी।
हिंदी वर्णमाला का ज्ञान,
कितनी मुश्किल से रटा- रटाया था;
उन बच्चों पर विधि-विधि से,
थोपनी होगी ये 'अंग्रेजी'।
क्यों बच्चा अंग्रेजी ही जाने
क्यों न जाने हिन्दी, संस्कृत;
ये कैसा रोग लगा है समाज को
हिंदी-अंग्रेजी विद्यालयों में
ऊँच-नीच की होड़ लगी।
रचयिता
तान्या सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय तेनुअन,
विकास खण्ड-पिपरौली,
जनपद-गोरखपुर।
चर्चा 'अंग्रेजी' की होने लगी।
कई विद्यालय खुल गए
अंग्रेजी माध्यम में किताबें होने लगी।
हिंदी वर्णमाला का ज्ञान,
कितनी मुश्किल से रटा- रटाया था;
उन बच्चों पर विधि-विधि से,
थोपनी होगी ये 'अंग्रेजी'।
क्यों बच्चा अंग्रेजी ही जाने
क्यों न जाने हिन्दी, संस्कृत;
ये कैसा रोग लगा है समाज को
हिंदी-अंग्रेजी विद्यालयों में
ऊँच-नीच की होड़ लगी।
रचयिता
तान्या सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय तेनुअन,
विकास खण्ड-पिपरौली,
जनपद-गोरखपुर।

Comments
Post a Comment