अहिंसा के पुजारी
सत्य और अहिंसा के पुजारी,
हाथ में डंडा, आँख में चश्मा,
घुटने तक धोती पहचान तुम्हारी।।
धन्य है वो माँ पुतलीबाई,
और पिता करमचंद गांधी,
जिनके लाल ने भारत को,
दिलायी आजादी,
पत्नी कस्तूरबा ने भी,
हर पल निभाया साथ।।
थे बैरिस्टर तुम नामी,
देख न सके देश की बर्बादी,
छोड़ कर सब कुछ,
थाम लिया लाठी और खादी।
सत्य अहिंसा के प्रयोग से ,
देश में आई आंधी,
अंग्रेजों से कर असहयोग,
निकल पड़े तुम दांडी,
तोड़ नमक कानून,
दिलाई तुमने,
कर से आजादी।।
भारत छोड़ो का नारा दे,
बन गए देश के गांधी,
तुम्हारे एक अपील से,
देश की जनता जागी।।
जन-जन में जगाकर सेवाभाव,
बन गए जन-जन के बापू,
स्वच्छता का अलख जगाकर,
सपना देखा स्वच्छ भारत का।
जन्मदिन पर आज तुम्हारे,
करते हम सब संकल्प,
रखेगें सदैव स्वच्छ,
घर, आँगन और परिवेश ।।
रचयिता
चंचला पाण्डेय,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मसीरपुर,
विकास खण्ड-बिलरियागंज,
जनपद-आज़मगढ़।
हाथ में डंडा, आँख में चश्मा,
घुटने तक धोती पहचान तुम्हारी।।
धन्य है वो माँ पुतलीबाई,
और पिता करमचंद गांधी,
जिनके लाल ने भारत को,
दिलायी आजादी,
पत्नी कस्तूरबा ने भी,
हर पल निभाया साथ।।
थे बैरिस्टर तुम नामी,
देख न सके देश की बर्बादी,
छोड़ कर सब कुछ,
थाम लिया लाठी और खादी।
सत्य अहिंसा के प्रयोग से ,
देश में आई आंधी,
अंग्रेजों से कर असहयोग,
निकल पड़े तुम दांडी,
तोड़ नमक कानून,
दिलाई तुमने,
कर से आजादी।।
भारत छोड़ो का नारा दे,
बन गए देश के गांधी,
तुम्हारे एक अपील से,
देश की जनता जागी।।
जन-जन में जगाकर सेवाभाव,
बन गए जन-जन के बापू,
स्वच्छता का अलख जगाकर,
सपना देखा स्वच्छ भारत का।
जन्मदिन पर आज तुम्हारे,
करते हम सब संकल्प,
रखेगें सदैव स्वच्छ,
घर, आँगन और परिवेश ।।
रचयिता
चंचला पाण्डेय,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मसीरपुर,
विकास खण्ड-बिलरियागंज,
जनपद-आज़मगढ़।

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