तितली रानी

बालमन की कल्पना को पंक्तिबद्ध करने की एक कोशिश....

काश मैं होती तितली रानी
उड़ती पंख पसार,
फूलों संग मैं खेला करती
पत्तों से करती प्यार।
झिलमिल झिलमिल पंख हिलाती
जाती नभ के पार,
बाग बगीचे वन उपवन में
भरती रंग हजार..
काश मैं होती तितली रानी
उड़ती पंख पसार।
रंग-बिरंगे फूलों का रस
चखती कई-कई बार,
तेज हवा संग मैं उड़ जाती
जगत अनंत अपार।
काश मैं होती तितली रानी
उड़ती पंख पसार।

रचयिता
अभिषेक गौरव,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सकरा,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद-गाजीपुर।

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