बेटों को समझाओ, बेटी को निडर बनाओ

आज विश्व बालिका दिवस पर सभी शिक्षकों, अभिभावकों को शुभकामनाएँ।
इस वक़्त बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान बहुत ही सफलतापूर्वक चल रहा है। क्या बस इसी से हम अपनी बेटियों को सुरक्षित कर सकते हैं? बेटी बचाओ कहकर तो पहले ही हम अपनी बेटियों को कमजोर मान लेते हैं हम यदि इसके स्थान पर अपने बेटों को समझाएँ तो शायद बेटियों को जो मानसिक, शारीरिक शोषण सहना पड़ रहा है उसमें कमी आ जाए।
यदि हम बात करें तो सामान्यतः आज भी न सिर्फ हमारा देश अपितु विश्व के अधिकांशतः देश पुरुष प्रधान हैं, ऐसे में सहना तो बालिका या स्त्री को ही पड़ता है। नन्हीं-नन्हीं बालिकाएँ अपने घर मे सुरक्षित नहीं है। इसके लिये कभी हम फिल्मों को, टीवी को और कभी उनके कपड़ो को दोषी ठहराते हैं। कभी यह नहीं कहते कि उस पुरूष या लड़के की गलती है। समाज मे ऐसा दोहरापन क्यों है? हर लड़की के मन में बचपन से यही डर होता है कि कहीं कुछ गलत न कोई कर जाए हमारे साथ। हर समय बालिकाएँ भय में जीती हैं। तुम लड़की हो ये न करो, वो काम न करो, पर लड़के को तो कोई टोकना भी न चाहता क्योंकि उनका तो जन्मसिद्ध अधिकार होता है वो कार्य करना।

इतिहास गवाह है कि आदिकाल से आदिशक्ति के रूप में कन्याओं की पूजा की जाती है पर चाहें त्रेतायुग हो जहाँ रावण के द्वारा सीता का हरण किया गया या फिर द्वापरयुग में पांडवों द्वारा जुएँ में द्रौपदी को हार जाना उसके पश्चात दुःशासन द्वारा द्रौपदी का चीर हरण। हर वक़्त बालिका या स्त्री को ही सहना पड़ता है कोई भी पुरुष कभी उससे उसकी जानने का प्रयास नहीं करता है।

जब भी किसी परिवार में कन्या का जन्म होता है उसी दिन से उसे समझाया जाता है की वो परायी है उसका उस घर पर कोई अधिकार नहीं और जब वो ब्याह कर दूसरे घर जाती है तब भी यही दर्द की वो पराये घर से आई है। हर पल प्रत्येक बालिका इस भय से घिरी होती है।
यदि हम शुरू से ही अपने लड़कों को बालिका की इज्जत करना सिखाएँगे, उसके द्वारा किये गए गलत कार्यों पर टोकने, उसे समझाने का प्रयास करें उसे स्त्री जाति का महत्व समझाएँगे तो शायद यह परिदृश्य बदल जाए।

तो आइए इस बालिका दिवस के अवसर पर शपथ लें अब बेटी बचाओ कहने की जगह हम अपने बेटों को समझाएँगे और अपनी बेटियों को हर परिस्थितियों का सामना करने के लिये तैयार करेंगे और निडर बनाएँगे।

लेखिका
ज्योति कुमारी,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोइलरा, 
विकास क्षेत्र-औराई,
जनपद-भदोही।

Comments

  1. Well written ..need of the hour👍

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  2. समाज में स्त्री का सम्मान स्त्रियों के कारण और शिक्षा की कमी के कारण हो रहा है ।यदि प्रत्येक परिवार में स्त्रियों की शिक्षा पर ध्यान दिया जाए और ससुराल में बहू, बेटी बन कर सभी का उचित सम्मान दे तो कोई भी पुरुष स्त्री का अपमान करने के बारे में 100बार सोचेगा ।

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