बापू

सत्य-अहिंसा के पुजारी को,
करता मैं शत्-शत् प्रणाम।
बापू जी जो होते तुम भी,
करते न देश पर गुमान।।
शहीद हुए जो देश की आन पर,
भूल गये उनका बलिदान।
सेवक बन लूट रहे देश को,
मिलता उन्हें अभयदान।।
सबके सब एक जैसे साथी,
जनता होती परेशान।
भूल गये वो चर्खा-खादी,
बढ़ता ही गया अभिमान।।
सत्य पथ चलते रहो साथी,
कुछ तो निकलेगा परिणाम।
सत्य-अहिंसा के पुजारी को,
करता मैं शत्- शत् प्रणाम।।

रचयिता
अनुपम राजवंशी,
सहसमन्वयक,
विकास क्षेत्र-हापुड़,
जनपद-हापुड़।

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