शास्त्री जी
शास्त्री जयन्ती पर शास्त्री जी के लिए श्रद्धा-शब्द
माँ भारती के लाल थे वो लाल बहादुर,
व्यक्तिव में कमाल थे वो लाल बहादुर,
थी सादगी अनुपम विचार उच्च कोटि के,
इंसान बेमिसाल थे वो लाल बहादुर,
देश-भक्ति की परम मिसाल बहादुर,
रोशन हो देश, बन गये मशाल बहादुर,
एक दिन का अन्न त्याग के अलख सी जलाई,
और देश को फिर से किया बहाल बहादुर,
कितना अजब ये कर दिया कमाल बहादुर,
दुश्मनों के बन गए थे काल बहादुर,
देश के जवानों पे निहाल बहादुर,
जय जवान-जय किसान घोष कर दिया,
फिर जाने कहाँ खो गए वो लाल बहादुर,
माता की गोद सो गए वो लाल बहादुर,
बस देश के ही हो गए वो लाल बहादुर,
माँ भारती के लाल थे वो लाल बहादुर।
रचयिता
पीयूष त्रिवेदी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैनामऊ,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।
माँ भारती के लाल थे वो लाल बहादुर,
व्यक्तिव में कमाल थे वो लाल बहादुर,
थी सादगी अनुपम विचार उच्च कोटि के,
इंसान बेमिसाल थे वो लाल बहादुर,
देश-भक्ति की परम मिसाल बहादुर,
रोशन हो देश, बन गये मशाल बहादुर,
एक दिन का अन्न त्याग के अलख सी जलाई,
और देश को फिर से किया बहाल बहादुर,
कितना अजब ये कर दिया कमाल बहादुर,
दुश्मनों के बन गए थे काल बहादुर,
देश के जवानों पे निहाल बहादुर,
जय जवान-जय किसान घोष कर दिया,
फिर जाने कहाँ खो गए वो लाल बहादुर,
माता की गोद सो गए वो लाल बहादुर,
बस देश के ही हो गए वो लाल बहादुर,
माँ भारती के लाल थे वो लाल बहादुर।
रचयिता
पीयूष त्रिवेदी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैनामऊ,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।

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