परिवर्तन के प्रकार
विज्ञान विषय की यह बात
जानते हैं मिलकर आज
निकलेगा इसका कुछ तो सार
सीखते हैं हम परिवर्तन के प्रकार
तेजी से जब होता बदलाव
तीव्र परिवर्तन है कहलाता
धीरे-धीरे जब समय लगे तो
मंद परिवर्तन है बन जाता
लाभदायक जब होता बदलाव
अनुकूल परिवर्तन है कहलाता
हानि मिले जिन बदलावों से
प्रतिकूल परिवर्तन है बन जाता
जो बदलाव हो निश्चित समय पर
वे नियमित परिवर्तन हैं कहलाते
अचानक जो आए बदलाव
वह अनियमित परिवर्तन हैं बन जाते
प्रत्यावर्तित परिवर्तन को
उत्क्रमणीय भी कहते हैं
परिस्थितियाँ हटा लेने पर
वस्तु पूर्व अवस्था में आते हैं
अप्रत्यावर्तित परिवर्तन
अनुत्क्रमणीय भी कहलाते हैं
परिस्थितियाँ हट भी जाएँ तो
वस्तु जस के तस रह जाते हैं
जब बदलाव हो कुछ ऐसा कि
नया पदार्थ ना बन पाए
भौतिक परिवर्तन कहलाए यह
पदार्थ पूर्व स्थिति में आ जाए
जब बदलाव हो जाए ऐसे
कि नया पदार्थ प्राप्त हो जाए
रासायनिक परिवर्तन कहलाए यह
पदार्थ के गुण धर्म भी बदल जाए
प्राकृतिक परिवर्तन से तो
हम सभी हैं आज भी परिचित
स्वयं से घटित होते हैं यह
रोक नहीं सकते इसको हम किंचित
कृत्रिम परिवर्तन के लिए
मानव होते हैं जिम्मेदार
आवश्यकताएँ पूरी हो जाएँ इससे
कर देते हैं जीवन आसान
जो कर लेते हैं हम नियंत्रण
नियंत्रित परिवर्तन कहलाता है
पर हाथ से जो बाहर हो जाए
वह अनियंत्रित परिवर्तन बन जाता है
रुको अभी तो बाकि है
जटिल परिवर्तन की यह बात
कठिन प्रक्रियाओं से होंगे जब
समय भी लेंगे यह हर बार
खत्म हुई अब बात
यह है परिवर्तन का ज्ञान
परिवेश से जुड़ी हुई है
यह है हमारे आसपास का आधार
रचयिता
मृदुला वैश्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीठाबेल,
विकास खण्ड-ब्रह्मपुर,
ज़िला-गोरखपुर।
जानते हैं मिलकर आज
निकलेगा इसका कुछ तो सार
सीखते हैं हम परिवर्तन के प्रकार
तेजी से जब होता बदलाव
तीव्र परिवर्तन है कहलाता
धीरे-धीरे जब समय लगे तो
मंद परिवर्तन है बन जाता
लाभदायक जब होता बदलाव
अनुकूल परिवर्तन है कहलाता
हानि मिले जिन बदलावों से
प्रतिकूल परिवर्तन है बन जाता
जो बदलाव हो निश्चित समय पर
वे नियमित परिवर्तन हैं कहलाते
अचानक जो आए बदलाव
वह अनियमित परिवर्तन हैं बन जाते
प्रत्यावर्तित परिवर्तन को
उत्क्रमणीय भी कहते हैं
परिस्थितियाँ हटा लेने पर
वस्तु पूर्व अवस्था में आते हैं
अप्रत्यावर्तित परिवर्तन
अनुत्क्रमणीय भी कहलाते हैं
परिस्थितियाँ हट भी जाएँ तो
वस्तु जस के तस रह जाते हैं
जब बदलाव हो कुछ ऐसा कि
नया पदार्थ ना बन पाए
भौतिक परिवर्तन कहलाए यह
पदार्थ पूर्व स्थिति में आ जाए
जब बदलाव हो जाए ऐसे
कि नया पदार्थ प्राप्त हो जाए
रासायनिक परिवर्तन कहलाए यह
पदार्थ के गुण धर्म भी बदल जाए
प्राकृतिक परिवर्तन से तो
हम सभी हैं आज भी परिचित
स्वयं से घटित होते हैं यह
रोक नहीं सकते इसको हम किंचित
कृत्रिम परिवर्तन के लिए
मानव होते हैं जिम्मेदार
आवश्यकताएँ पूरी हो जाएँ इससे
कर देते हैं जीवन आसान
जो कर लेते हैं हम नियंत्रण
नियंत्रित परिवर्तन कहलाता है
पर हाथ से जो बाहर हो जाए
वह अनियंत्रित परिवर्तन बन जाता है
रुको अभी तो बाकि है
जटिल परिवर्तन की यह बात
कठिन प्रक्रियाओं से होंगे जब
समय भी लेंगे यह हर बार
खत्म हुई अब बात
यह है परिवर्तन का ज्ञान
परिवेश से जुड़ी हुई है
यह है हमारे आसपास का आधार
रचयिता
मृदुला वैश्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीठाबेल,
विकास खण्ड-ब्रह्मपुर,
ज़िला-गोरखपुर।

shandat
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