गुरु

शिक्षक तो है, युग निर्माता।
छात्र भविष्य का भाग्य विधाता।
अपने बीच हमें पा,
उन्हें बहुत ही भाता,
कुछ हम उनसे,
और सब कुछ वह हमसे पाता।
हम भी उनसे सीखते,
उन्हें लगता गुरु हमें सिखाता,
उनका पालन करता,
हमें देवता बताता।
आओ दृढ़ संकल्प करें,
उन्हें न देंगे धोखा,
भर देंगे उनकी रग-रग में,
भारत भाग्य विधाता।
                     
रचयिता
अनवर अहमद, 
प्रधानाध्यापक, 
प्राथमिक विद्यालय पिपराव,
विकास खण्ड-मड़िहान, 
जनपद-मीरजापुर।

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