वक्त

बेटियों के हिस्से का
वो वक़्त
जो तुम्हारे साथ गुज़रता है!!!!

वो वक़्त
दो लम्हों का 
कुछ ऐसा होता है
जैसे
चिलम पर कोई
तम्बाकू रखकर गहरे कश ले ले।

वो वक़्त
जो तुम्हें देखकर गुज़रता है
ऐसा लगता है
जैसे
एक वक़्त की रोज़ी
कोई हाथ पर रख दे।

वो वक़्त
जब तुम खड़ी होती हो
ऐसा लगता है
जैसे
हौले से चलकर कायनात रुक गयी हो।

वो वक़्त
जब लबों पर मुस्कान खेलती है
लगता है जैसे
फ़िज़ा खिलखिला रही हो।

उन लम्हों के दो घूंट
तुम भी पीती हो
हम भी
फिर यूँ लगता है
जैसे
न बुझने वाली प्यास
दूर कहीं क्षितिज पर
बैठी थक कर आराम कर रही है।

वो वक़्त, बस वो वक़्त!!!!!!!
बेटियों को समर्पित
     
रचयिता
सीमा अग्रवाल,
सहायक अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हाफ़िज़पुर उबारपुर,
विकास क्षेत्र-हापुड़,
जनपद-हापुड़।

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