जड़ और फूल
एक पेड़ था गुलमोहर का
फूल खिले गुलदस्ते जैसे।
फूलों को शैतानी सूझी
जड़ नहीं हो, हमारे जैसे।।
अभिमान हो गया सुन्दरता का
बदसूरत कहकर हँसी उड़ाई।
इंतजार था सही समय का
जड़ तब तक चुपचाप रही।।
वर्षा आई बादल गरजे
बिजली चमकी जोर-शोर से।
गिरकर बिजली गुलमोहर पर
ठूंठ किया चहुँओर ओर से।।
वर्षा बीती सर्दी बीती
बसंत आया झूम-झूम कर।
चमत्कार फिर हुआ पेड़ पर
पत्ते निकले हरित होकर।।
कलियों से वे फूल बन गए
जड़ ने पूछा, क्या हाल है भाई?
फूल हुए बहुत शर्मिन्दा
अपनी गलती समझ में आई।।
नवकुसुमित पुष्पों ने समझा
जड़ के बिन नहींअस्तित्व हमारा।
बार-बार फिर क्षमा माँग कर
बोले सचमुच तुम हो प्यारा।।
रचयिता
डॉ0 सुमन गुप्ता,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय कोट,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।
फूल खिले गुलदस्ते जैसे।
फूलों को शैतानी सूझी
जड़ नहीं हो, हमारे जैसे।।
अभिमान हो गया सुन्दरता का
बदसूरत कहकर हँसी उड़ाई।
इंतजार था सही समय का
जड़ तब तक चुपचाप रही।।
वर्षा आई बादल गरजे
बिजली चमकी जोर-शोर से।
गिरकर बिजली गुलमोहर पर
ठूंठ किया चहुँओर ओर से।।
वर्षा बीती सर्दी बीती
बसंत आया झूम-झूम कर।
चमत्कार फिर हुआ पेड़ पर
पत्ते निकले हरित होकर।।
कलियों से वे फूल बन गए
जड़ ने पूछा, क्या हाल है भाई?
फूल हुए बहुत शर्मिन्दा
अपनी गलती समझ में आई।।
नवकुसुमित पुष्पों ने समझा
जड़ के बिन नहींअस्तित्व हमारा।
बार-बार फिर क्षमा माँग कर
बोले सचमुच तुम हो प्यारा।।
रचयिता
डॉ0 सुमन गुप्ता,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय कोट,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

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