जरा सँभलकर चलिए

जिंदगी की राह में
जरा सँभलकर चलिए...

हर मोड़ पर फूल मिलें,
ये मुमकिन तो नहीं
काँटों से भी जरा
जीवन में दोस्ती रखिए

जिंदगी की राह में
जरा संभल कर चलिए

हो नाराजगी गर आपस में
दूरियाँ न बनाया करो
वो न भी हँसे तो
आप मुस्करा कर मिलिए

 जिंदगी की राह में
जरा सँभलकर चलिए

चाहे विपरीत परिस्थिति हो
कितनी घोर परेशानियाँ हो
लेकर प्रेरणा दुःख से
उस दर्द से उबरिए

जिंदगी की राह में
जरा सँभलकर चलिए

रचयिता
प्रतिभा चौहान,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर,
विकास खंड-डिलारी,
जनपद-मुरादाबाद।

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