अंतर्राष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस
दादा, बाबा, दादी, नाना, नानी से है हमारी पहचान,
बुजुर्ग हैं हमारे घर की शान, इनसे मिलता हमको ज्ञान।
बुजुर्ग हैं उस पुराने बरगद के वृक्ष की तरह,
जिसकी छाँव में मिलती है हम सबको पनाह।
हमें करना है अपने बड़े बुजुर्गों का आदर,
वृद्धावस्था में ना करें उनका अनादर।
आज हम जवान हैं कल हम भी वृद्ध होंगे,
वृद्धावस्था के दिन हमें भी झेलने होंगे।
रचयिता
शालिनी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय बनी,
विकास खण्ड-अलीगंज,
जनपद-एटा।

Comments
Post a Comment