स्कूल चलो अभियान
बाटे स्कूलवा जे गउवाॅ में अपने,
होत बा पढाई खूब ठीक हो।
आवा हो भइया लिखावा नाम बबुवन के,
रहिहॅ हर जगही से बीस हो।
दादा पढ़लेन एही जगह, आप भी त पढ़लेन,
गउवाॅ, समजवा क नमवाॅ बढ़वलेन।
रखा तनिक ध्यान अपने नन्हें-मुन्ने लाडलन क,
नमवाॅ द लिखवाई आके ईहॅ हो।
आवा हो भइया ..............
हिन्दी भी पढिहॅ, अंग्रेजी भी पढिहॅ,
पढिहॅ हो बाबू संस्कृत हो।
जोड़वा-घटनवाॅ, गुणा- भाग करिहॅ,
मन से जे पढिहॅ गणित हो।
आवा हो भइया ............
विज्ञान पढ़ नई दुनिया के जनिहॅ,
देश और समाज ज्ञान परिवेश से करिहॅ।
कविता-कहानी और खेल माध्यमवाॅ से,
तन-मन होई विकसित खूब हो।
आवा हो भइया ..........
सांस्कृतिक कार्यक्रम, मीना मंच रेडियो पे,
पढ़ जनरल नाॅलेज खूब बनिहॅ मेधावी, तेज।
चाह बाटे ईह हम गुरुजन लोगवा के,
नाम करें बहिनी- बाबू सब एही गउवाॅ के।
पढ़ॅ विद्या ज्ञान और नवोदय विद्यालय में मनवाॅ के तब मिली सुख हो।
आवा हो भइया ............
रचयिता
अरविन्द कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय धवकलगंज,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-वाराणसी।
होत बा पढाई खूब ठीक हो।
आवा हो भइया लिखावा नाम बबुवन के,
रहिहॅ हर जगही से बीस हो।
दादा पढ़लेन एही जगह, आप भी त पढ़लेन,
गउवाॅ, समजवा क नमवाॅ बढ़वलेन।
रखा तनिक ध्यान अपने नन्हें-मुन्ने लाडलन क,
नमवाॅ द लिखवाई आके ईहॅ हो।
आवा हो भइया ..............
हिन्दी भी पढिहॅ, अंग्रेजी भी पढिहॅ,
पढिहॅ हो बाबू संस्कृत हो।
जोड़वा-घटनवाॅ, गुणा- भाग करिहॅ,
मन से जे पढिहॅ गणित हो।
आवा हो भइया ............
विज्ञान पढ़ नई दुनिया के जनिहॅ,
देश और समाज ज्ञान परिवेश से करिहॅ।
कविता-कहानी और खेल माध्यमवाॅ से,
तन-मन होई विकसित खूब हो।
आवा हो भइया ..........
सांस्कृतिक कार्यक्रम, मीना मंच रेडियो पे,
पढ़ जनरल नाॅलेज खूब बनिहॅ मेधावी, तेज।
चाह बाटे ईह हम गुरुजन लोगवा के,
नाम करें बहिनी- बाबू सब एही गउवाॅ के।
पढ़ॅ विद्या ज्ञान और नवोदय विद्यालय में मनवाॅ के तब मिली सुख हो।
आवा हो भइया ............
रचयिता
अरविन्द कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय धवकलगंज,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-वाराणसी।

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