वीर अब्दुल हमीद

आओ सुनाऊँ तुम सबको एक बच्चे की कहानी,
जिसने बचपन से थी फौजी बनने की ठानी।
पिता करते थे कपड़े सीने का काम,
बच्चे के मन में था देश सेवा का अरमान।
छोड़ अपना सब ऐशो-आराम,
वह निकल पड़ा बनने भारत का अभिमान।
8 सितम्बर की भयानक काली रात में,
देश पर हुए हमले के जवाब में,
वह जवान बिन तोप और टैंक के दुश्मन से लड़ा,
उसके इस कदम से दुश्मन देश लड़खड़ा पड़ा,
उसकी साधारण  बंदूकों ने दुश्मन के पैंटन टैंको का निशाना गढ़ा,
गोला लगने के बाद भी वह लहूलुहान अंत तक लड़ा।
भारत -पाक 1965 के जाबांज तुझे सलाम,
युगों युगों तक यह देश कहेगा
जय हो अमर जवान, जय हो अमर जवान।

रचयिता
प्रीति अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिजौली,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।


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