स्कूल चलो

स्कूल, स्कूल, स्कूल चलो सब,
बीती छुट्टी, फ़िर से स्कूल चलो अब।
खुल गए सारे स्कूल, स्कूल चलो सब।

गणित, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, ज्ञान-विज्ञान समझने को।
सामाजिक विज्ञान, इतिहास, भूगोल का ज्ञान प्राप्त करने को।
कला, साहित्य, नैतिकता परिवेशीय ज्ञान अर्जन करने को।
स्कूल, स्कूल, स्कूल चलो सब....

A,b,c,d.... क ख ग घ... 1234.... पढ़ने को।
अक्षर-शब्द, वाक्य, स्वर-व्यंजन, भाषा का ज्ञान प्राप्त को।
नाप-तौल, गिनती-पहाड़े, लम्बाई- चौड़ाई समझने को।
स्कूल, स्कूल, स्कूल चलो सब.....

जोड़, घटाना, गुणा, भाग, नए सवाल हल करने को।
रस, छंद, अलंकार, समास का भेद समझने को।
कहानी-कविता, निबंध-नाटक, उपन्यास आदि पढ़ने को।
स्कूल, स्कूल, स्कूल चलो सब......

निरक्षर से साक्षर बनकर, सभ्य इंसान कहलाने को।
डॉक्टर, इंजीनियर, पायलट, अफसर, वकील, प्रोफेसर बनने को।
शिक्षित, सभ्य, शिष्ट, उत्कृष्ट समाज का सृजन करने को।

स्कूल, स्कूल, स्कूल चलो सब.....
बीती छुट्टी, फ़िर से स्कूल चलो अब।
खुल गए सारे स्कूल, स्कूल चलो सब।

रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।

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