पदार्थों का पृथक्करण
विषय-विज्ञान
कक्षा-6
पाठ-3
"पदार्थों का पृथक्करण"
खेल है सबके मन को भाए
नन्हें बच्चे खेलने आए।
थी धूप और मई का महीना
लगा निकलने सबके पसीना।
खूब खेल के थक गए
जब वो सारे छक गए।
तब वापस कक्षा में आए
गुरु जी शरबत दिए बनाये।
थोड़ा-थोड़ा बँटा फिर सबमें
आयी स्फूर्ति तब जाके तन में।
गुरूजी बोले मोहन आओ
शरबत कैसे बना बताओ।
मोहन बोला बहुत सरल है
इस मिश्रण में नींबू, चीनी व जल है।
मिश्रण सुन के सोहन चौंका
बोला शरबत है! मोहन को टोका।
गुरूजी ने फिर सार बताया
मिश्रण क्या है ये समझाया।
दो या दो से अधिक पदार्थ
जब मिलें किसी भी अनुपात।
मिश्रण इसे हम कहते हैं
यह दो प्रकार के होते हैं
समांगी और विषमांगी मिश्रण
किया बोर्ड पर इसका चित्रण।
समांगी मिश्रण वो होता है
जिसमें दो या अधिक अवयव मिले
पर अलग-अलग ना दीख पड़ें
जैसे वायु, दूध, समुद्री जल
और कोल्ड्रिंक्स की बोतल।
विषमांगी इसका उल्टा है।
अवयव अलग-अलग हैं दिखते
आओ देखें इसको करके।
काजल थोड़ी बालू लायी
लोहे की छीलन गयी मिलायी
अवयव अलग-अलग हैं दिखते
इसको ही विषमांगी कहते।
गुरूजी बोले.....
यह अवयव अब कैसे अलग करें
कंचन बोली....
गुरु चुम्बक से इन्हे पृथक करें
चुम्बक ले जायेगा छीलन सारी
बालू यहीं रह जाए बेचारी
यह है पृथक्करण विधि
सब बच्चों में अब होड़ सधी
सीखेंगे हम सब बढ़ चढ़कर
विज्ञान को मनोरंजक कर।
रचयिता
जैतून जिया,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय गाजू,
विकास खण्ड-कछौना,
जनपद-हरदोई।
कक्षा-6
पाठ-3
"पदार्थों का पृथक्करण"
खेल है सबके मन को भाए
नन्हें बच्चे खेलने आए।
थी धूप और मई का महीना
लगा निकलने सबके पसीना।
खूब खेल के थक गए
जब वो सारे छक गए।
तब वापस कक्षा में आए
गुरु जी शरबत दिए बनाये।
थोड़ा-थोड़ा बँटा फिर सबमें
आयी स्फूर्ति तब जाके तन में।
गुरूजी बोले मोहन आओ
शरबत कैसे बना बताओ।
मोहन बोला बहुत सरल है
इस मिश्रण में नींबू, चीनी व जल है।
मिश्रण सुन के सोहन चौंका
बोला शरबत है! मोहन को टोका।
गुरूजी ने फिर सार बताया
मिश्रण क्या है ये समझाया।
दो या दो से अधिक पदार्थ
जब मिलें किसी भी अनुपात।
मिश्रण इसे हम कहते हैं
यह दो प्रकार के होते हैं
समांगी और विषमांगी मिश्रण
किया बोर्ड पर इसका चित्रण।
समांगी मिश्रण वो होता है
जिसमें दो या अधिक अवयव मिले
पर अलग-अलग ना दीख पड़ें
जैसे वायु, दूध, समुद्री जल
और कोल्ड्रिंक्स की बोतल।
विषमांगी इसका उल्टा है।
अवयव अलग-अलग हैं दिखते
आओ देखें इसको करके।
काजल थोड़ी बालू लायी
लोहे की छीलन गयी मिलायी
अवयव अलग-अलग हैं दिखते
इसको ही विषमांगी कहते।
गुरूजी बोले.....
यह अवयव अब कैसे अलग करें
कंचन बोली....
गुरु चुम्बक से इन्हे पृथक करें
चुम्बक ले जायेगा छीलन सारी
बालू यहीं रह जाए बेचारी
यह है पृथक्करण विधि
सब बच्चों में अब होड़ सधी
सीखेंगे हम सब बढ़ चढ़कर
विज्ञान को मनोरंजक कर।
रचयिता
जैतून जिया,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय गाजू,
विकास खण्ड-कछौना,
जनपद-हरदोई।

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