खुशियाँ ही खुशियाँ

विद्यालय में प्रतिपल हमको,
खुशियाँ ही खुशियाँ मिलती हैं।
इन प्यारे बच्चों संग रहने से,
सच्ची खुशियाँ हमें मिलती हैं।
चाहें कितने दुख कभी हम पर हों,
चाहे दर्द हमें तड़पाते हों।
इनकी मुस्कान को देखते ही,
बीमारी मिट जाती है।
बच्चों के संग हमें खेलने से,
कष्टों की याद न आती है।
ये अशोक बड़ा खुशकिस्मत है,
विद्यालय ही मेरी जन्नत है।
इन छोटे-छोटे बच्चों संग,
सच्ची खुशियाँ हमें मिलती हैं।
विद्यालय में प्रतिपल हमको,
खुशियाँ ही खुशियाँ मिलती हैं।

रचयिता
अशोक कुमार,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रामपुर कल्याणगढ़
विकास खण्ड-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।

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