मंगल पाण्डेय
भारत तो सदा क्रांतिकारी,
वीरों का देश रहा।
हम रहें या नहीं रहें,
जिनका पावन उद्देश्य रहा।
स्वतंत्रता के लिए कर दिया,
तन-मन-धन अर्पण।
क्रांतिवीर मंगल पाण्डेय,
को बारम्बार नमन।
जिसका स्वर सुनकर गूँजी,
जग की सकल दिशाएँ।
खड्ग हाथ लिए खड़ी हो गयीं,
भारत की ललनाएँ।
अवनी काँपी, अम्बर काँपा,
सुनकर जिसका गर्जन।
क्रांतिवीर मंगल पाण्डेय को,
बारम्बार नमन।
मेरठ में मंगल पाण्डेय ने,
धधकाई वो ज्वाला।
जिसने अंग्रेजी शासन का,
पटापेक्ष कर डाला।
सन् 47 में फलित हुआ
फिर ,
जिसका व्रत पावन।
क्रांति वीर मंगल पाण्डेय
बारम्बार नमन।
वीरों का देश रहा।
हम रहें या नहीं रहें,
जिनका पावन उद्देश्य रहा।
स्वतंत्रता के लिए कर दिया,
तन-मन-धन अर्पण।
क्रांतिवीर मंगल पाण्डेय,
को बारम्बार नमन।
जिसका स्वर सुनकर गूँजी,
जग की सकल दिशाएँ।
खड्ग हाथ लिए खड़ी हो गयीं,
भारत की ललनाएँ।
अवनी काँपी, अम्बर काँपा,
सुनकर जिसका गर्जन।
क्रांतिवीर मंगल पाण्डेय को,
बारम्बार नमन।
मेरठ में मंगल पाण्डेय ने,
धधकाई वो ज्वाला।
जिसने अंग्रेजी शासन का,
पटापेक्ष कर डाला।
सन् 47 में फलित हुआ
फिर ,
जिसका व्रत पावन।
क्रांति वीर मंगल पाण्डेय
बारम्बार नमन।
रचयिता
डॉ0 प्रवीणा दीक्षित,
हिन्दी शिक्षिका,
के.जी.बी.वी. नगर क्षेत्र,

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