नया सत्र
नव ऊर्जा, नव उत्साह से,
नया सत्र आरम्भ करें
नये छात्र-छात्राओं संग
नव कक्षा प्रारम्भ करें!
शिक्षा दान है महादान
शिक्षा में बीज है जीवन का
शिक्षा से हो सम्पूर्ण विकास
बालक के कौशल, तन, मन का!
जिम्मेदारी बड़ी है अपने
कंधों पर ये समझना है
बच्चों के माध्यम से हमको
राष्ट्र निर्माण ही करना है!
नयी शुरुआत करनी है
संकल्पबद्ध हो काम करें
सरकारी विद्यालयों का
हम जग मे ऊँचा नाम करें!
विद्यालयों के बिना हमारा
कोई भी तो अर्थ नहीं
शिक्षा जो पायी है हमने
करना उसको व्यर्थ नहीं!
घर-घर जले दीप शिक्षा का
ना अब कहीं अंधेरा हो
झुग्गी झोपडी वालों के भी
जीवन में नया सवेरा हो!
पथप्रदर्शक हम ही तो हैं
हमको ही मार्ग दिखाना है
भटके हुए इंसानों को हमें
सही राह पर लाना है!
अभिभावकों की आशाओं पर
हमको खरा उतरना है
कर्मक्षेत्र मे हमको अपने
पथ पर आगे बढ़ना है!
शिक्षक खुद जलकर औरों का
पथ प्रकाशित करता है
दीप जलाकर शिक्षा का
जीवन के तम को हरता है!
छात्र-छात्राओं के जीवन
और बचपन को महकाना है
संस्कारों से युक्त उन्हें
अच्छा इंसान बनाना है!
शिक्षक की महिमा को कोई
नहीं आज तक कह पाया
शब्दों की सीमा में इसको
बाँध नहीं कोई पाया!
ऐसे शिक्षक बनने का
सौभाग्य हमने पाया है
शिक्षित करना है उसको
जो पास हमारे आया है!
आओ मिल समाज को अपनी
शिक्षा का हम दान करें
एक स्वच्छ, सुन्दर, गरिमामय
राष्ट्र का हम निर्माण करें!!
रचयिता
भारती शर्मा,
सहायक अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवबन्द देहात,
विकास खण्ड-देवबन्द,
जनपद-सहारनपुर।
नया सत्र आरम्भ करें
नये छात्र-छात्राओं संग
नव कक्षा प्रारम्भ करें!
शिक्षा दान है महादान
शिक्षा में बीज है जीवन का
शिक्षा से हो सम्पूर्ण विकास
बालक के कौशल, तन, मन का!
जिम्मेदारी बड़ी है अपने
कंधों पर ये समझना है
बच्चों के माध्यम से हमको
राष्ट्र निर्माण ही करना है!
नयी शुरुआत करनी है
संकल्पबद्ध हो काम करें
सरकारी विद्यालयों का
हम जग मे ऊँचा नाम करें!
विद्यालयों के बिना हमारा
कोई भी तो अर्थ नहीं
शिक्षा जो पायी है हमने
करना उसको व्यर्थ नहीं!
घर-घर जले दीप शिक्षा का
ना अब कहीं अंधेरा हो
झुग्गी झोपडी वालों के भी
जीवन में नया सवेरा हो!
पथप्रदर्शक हम ही तो हैं
हमको ही मार्ग दिखाना है
भटके हुए इंसानों को हमें
सही राह पर लाना है!
अभिभावकों की आशाओं पर
हमको खरा उतरना है
कर्मक्षेत्र मे हमको अपने
पथ पर आगे बढ़ना है!
शिक्षक खुद जलकर औरों का
पथ प्रकाशित करता है
दीप जलाकर शिक्षा का
जीवन के तम को हरता है!
छात्र-छात्राओं के जीवन
और बचपन को महकाना है
संस्कारों से युक्त उन्हें
अच्छा इंसान बनाना है!
शिक्षक की महिमा को कोई
नहीं आज तक कह पाया
शब्दों की सीमा में इसको
बाँध नहीं कोई पाया!
ऐसे शिक्षक बनने का
सौभाग्य हमने पाया है
शिक्षित करना है उसको
जो पास हमारे आया है!
आओ मिल समाज को अपनी
शिक्षा का हम दान करें
एक स्वच्छ, सुन्दर, गरिमामय
राष्ट्र का हम निर्माण करें!!
रचयिता
भारती शर्मा,
सहायक अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवबन्द देहात,
विकास खण्ड-देवबन्द,
जनपद-सहारनपुर।

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