शिक्षक की छाया

शिक्षक कोई नाम नहीं,

शिक्षक कोई पद नहीं,

शिक्षक शिक्षा की छाया है,

शिक्षक एक वट वृक्ष हैं।।


जिसकी लम्बी- लम्बी जटाओं से,

उत्प्रेरित हर घर का फलसफा हैं,

जिसकी छाया में बुझते दीपक जल उठते हैं,

जिसकी निगरानी में सारे बीज अंकुरित हो उठते हैं,

जिसकी परछाई से एकलव्य धनुर्धर बन गया।।


शिक्षक------


शिक्षक एक विराट पुरुष का द्योतक हैं,

जिसकी अनेक भुजाएँ सभी की अच्छाईयों बुराईयों को समा लेती हैं,

फिर निकलता हैं एक दिव्य उजाला,

जिससे संसार का कोना -कोना जगमागता है।।


शिक्षक.......


शिक्षक की छाया में हम सुरक्षित, जग सुरक्षित।।

विश्व गुरु होने का अभिमान सुरक्षित,

भारतीय होने का ऊँचा ललाट सुरक्षित।।


शिक्षक.....


रचयिता
शालिनी सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय जानकीपुर,
विकास खण्ड-सिराथू,
जनपद-कौशाम्बी।



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