147/2025, बाल कहानी- 11 सितम्बर
बाल कहानी - दोस्ती का फर्ज
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एक पाँच साल का बच्चा दिनेश आँगनबाड़ी में पढ़ता था। दिनेश को आँगनबाड़ी में जाना बहुत अच्छा लगता था। वह सभी बच्चों के साथ मिल-जुलकर रहता था। उसकी अध्यापिका रचना दीदी भी कोमल स्वभाव की थी। बच्चों को डाँटती तक न थी। प्यार से उन्हें नये-नये खेल, कविताएँ, कहानियाँ आदि की गतिविधियाँ कराती और सिखाती थी। बच्चे बहुत खुश रहते थे। दिनेश हमेशा नये-नये खिलौने लेकर आता था लेकिन उसके दोस्त रमेश के पास एक भी खिलौना नहीं था।
एक दिन दिनेश ने अपने पिताजी से कहा, "पिताजी! मुझे पैसे दे दो।" पिताजी ने पूछा, "तुम पैसे का क्या करोगे? सब कुछ तो तुम्हारे पास है।"
दिनेश ने कहा, "मेरे दोस्त रमेश के पास एक भी खिलौना नहीं है।" यह सुनकर दिनेश के पापा ने उसे गोद में उठाकर कहा, "बेटा! तुम बहुत अच्छे बच्चे हो। मैं तुम्हारे दोस्त को खिलौना खरीद कर दूँगा।"
अगले दिन दिनेश के पिताजी रमेश के लिए एक सुन्दर-सा खिलौना लाये। दिनेश ने खुशी से दौड़कर वह खिलौना रमेश को दे आया। रमेश खिलौना को देखकर बहुत खुश हुआ।
#संस्कार_सन्देश -
कहानी दोस्ती में सहयोग और समर्थन के महत्व को उजागर करती है, जो दोस्तों को एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने मे मदद करती है।
कहानीकार-
#दमयन्ती_राणा (स० अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी
वि० ख० कर्णप्रयाग जिला चमोली (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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