162/2025, बाल कहानी- 30 सितम्बर


बाल कहानी - मिशन शक्ति की थाना प्रभारी
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आज मैंने जैसे ही कक्षा में प्रवेश किया। सभी बच्चे उठकर खड़े हुए और हाथ जोड़कर रोज की तरह कहने लगे, "सुप्रभात सर!"
मैंने भी 'सुप्रभात' कहकर बैठने को कहा। सभी बच्चे एक साथ 'धन्यवाद' कहकर बैठ गये।
तभी दीपिका ने कहा, सरजी! आपने बहुत अच्छी कहानी लिखी है। पढ़कर बहुत अच्छा लगा कि लोग लड़कियों को इतना महत्व दे रहे हैं। हाईस्कूल और इण्टर काॅलेज की टाॅपर लड़कियों को काॅलेजों में एक दिन की प्रधानाचार्य की कमान दी गई।"
"हाँ, सर! बहुत बढ़िया और प्रेरणादायक कहानी है। जबसे मैंने प्रार्थना-स्थल पर इसे सुना है, तबसे मैंने सोच लिया है कि मैं भी सभी कक्षाओं में टाॅपर रहूँगी।"
प्राची की बात सुनकर प्रतीक्षा भी बोल पड़ी, "सर! अगर मैं टाॅपर रही तो क्या मुझे एक दिन का प्रधानाचार्य बनाया जायेगा?"
"क्यों नहीं! लेकिन इसके लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरुरी है। टाॅपर के साथ-साथ उस छात्र या छात्रा में धैर्य और संयम तथा अनुशासन जैसे गुणों की प्रबलता जरुरी है। वह लम्बे समय तक माॅनीटर रहा हो तथा सभी के प्रति उसका प्रेमपूर्ण व्यवहार रहा हो। सहयोग की भावना उसमें रही हो।... ये सब गुण उसमें होना बहुत जरुरी है, तभी उसे किसी कार्य का उत्तरदायित्व सौंपा जाता है ताकि वह उसे कर सके।" मेरी बात सुनकर सभी बच्चे मौन थे। मैंने कहा, "तुम्हें पता है कि जिस तरह कालेजों में छात्राओं को एक दिन का प्रधानाचार्य बनाया गया, उसी प्रकार होनहार सक्रिय छात्राओं को सम्बन्धित थाने में एक दिन का थाना प्रभारी भी बनाया गया।"
"थाना प्रभारी!" सभी बच्चे बोले।
"हाँ, बच्चों!" मैंने पुन: कहा, "बच्चों! हमारे यहाँ थाना घाट लहचूरा में अनेक सिंह मुखिया इण्टर काॅलेज खँदरका की छात्रा को एक दिन का थाना प्रभारी बनाया गया। कार्यभार ग्रहण करते ही उन्होंने पूरे थाने का सघनता से निरीक्षण कर सफाई पर बल दिया। जूली श्रीवास ने बतौर थाना प्रभारी कार्यभार सँभालते हुए महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर गम्भीरता से काम किया। इस दौरान मौके पर कई प्रार्थना पत्र आये, जिनका मौके पर ही निस्तारण किया गया। वहीं एक प्रकरण में पति द्वारा पत्नी के साथ मारपीट किए जाने की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को धारा 151 के तहत चालान किया। इतना ही नहीं, हमारे जिले के विभिन्न क्षेत्र व ब्लाॅकों के विभिन्न थानों में छात्राओं को एक दिन का प्रभारी बनाया गया।"
"सर! और कहाँ-कहाँ के थानों छात्राओं को थाना प्रभारी बनाया गया?"
"बच्चों! मिशन शक्ति-5 के तहत स्यावरी निवासी नन्दिनी को मऊरानीपुर प्रभारी निरीक्षक बनाया गया। इसी तरह रामजानकी हाईस्कूल उल्दन की टाॅपर छात्रा अंबिका श्रीवास, थाना सकरार में जी० आई० सी० इण्टर काॅलेज की टाॅपर छात्रा खुशी को, गरौठा में कक्षा-7 की छात्रा वैष्णवी को कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बनाया गया। इसी तरह कटेरा में पी० एम० श्री० राजकीय इण्टर काॅलेज की कक्षा-11 की छात्रा सिद्धि नामदेव और टहरौली के एक विद्यालय की छात्रा भूमि बंकर ने थाना प्रभारी बनकर जनसुनवाई की। गुरसरांय में खेर इण्टर काॅलेज की टाॅपर छात्रा समीक्षा अग्रवाल को, समथर में महाराजा वीरसिंह राजकीय इण्टर काॅलेज की कक्षा-12 की छात्रा मोहिनी को, एरच में गोस्वामी तुलसीदास इण्टर काॅलेज की छात्रा काजल राजपूत को, मोंठ में तृप्ति दीक्षित को, बबीना में कस्तूरबा आवासीय विद्यालय रसोई की चौदह वर्ष की छात्रा कंचन लोधी को तथा बरुआसागर में भक्ति तिवारी को उनके जन्म-दिन पर थाना प्रभारी बनाया गया। इसी तरह ककरबई में 12वीं की छात्रा खुशी पाठक, चिरगाँव में कल्पना प्रजापति और पूँछ में सान्वी भारद्वाज को एक दिन के थानाध्यक्ष का चार्ज दिया गया। इन सबने एक ही दिन में बहुत कुछ कर दिखाया।" 
"सर! जैसे अनिल कपूर को एक फिल्म में दो दिन का मुख्यमन्त्री बनाया गया था।" नीतेश की बात पर सभी हँस पड़े। 
"बच्चों! वह फिल्मों की बात थी। यह हकीकत है। हमारे पास इन सबकी फोटो का न्यूज पेपर भी है। देखिए- मैं सबको दिखाता हूँ। ..देखिए....ये सबसे ऊपर बंगरा, सरकार, गरौठा, फिर नीचे कटेरा, टहरौली, गुरसरांय, फिर नीचे बबीना, बरुआसागर, ककरबई फिर सबसे नीचे चिरगाँव और पूँछ की खबरें और फोटो हैं। यह दैनिक जागरण की खबरें हैं। हमें रोज अखबार जरुर पढ़ना चाहिए, इससे हमें तरह-तरह की जानकारियाँ मिलती हैं और हममें कुछ करने, कुछ बनने का मन होता है।" 
"सर! ये ऊपर वायीं ओर दो-तीन फोटो कहाँ की हैं? बानी ने पूछा।
"ये गान्धी विद्यालय इण्टर काॅलेज मऊरानीपुर की है, जहाँ कक्षा-10 की छात्रा को एक दिन का प्रधानाचार्य बनाया गया। उसके नीचे चिरगाँव में राजमाता लड़ई दुलइया कन्या इण्टर काॅलेज की छात्रा महक राजपूत को और टहरौली, जहाँ आदर्श जनप्रिय इण्टर काॅलेज में छात्रा सीता को प्रधानाचार्या बनाया गया। इन सबने अपने-अपने विद्यालय में पठन-पाठन, सफाई व्यवस्था, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का निरीक्षण किया। सीता को विद्यालय परिवार द्वारा सम्मानित भी किया गया।"
"सर! अब हमें भी टाॅपर बनकर दिखाना है।" अंशिका ने कहा।
"सिर्फ तुम्हें या सबको...?"
"सबको सर!" सबने हाथ उठाकर कहा। मैंने सब बच्चों को 'शाबाशी' दी और 'धन्यवाद' दिया। आज वह सचमुच यह सब जानकर बहुत प्रसन्न थे।

#संस्कार_सन्देश -
शिक्षक और पुलिस ये हमें सुसंस्कृत और लायक बनाकर सही दिशा दिखाते हैं। 

कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी (शि०मि०)
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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