विषय- संस्कृत, प्रकरण- सन्धियों का पुनर्अभ्यास(व्याकरण) शीट क्रमांक -24/2025 का हल, दैनिक संस्कृत शिक्षण


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क्रमांक - 24/2025 का हल

#दैनिक_संस्कृत_शिक्षण (अभ्यास कार्य)

दिनांक- 03/09/2025 

दिन- बुधवार 

प्रकरण- #व्याकरण

सन्धियों का पुनर्अभ्यास 

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व्याकरण 

बच्चों! आज हम कुछ और सन्धियों के बारे में जानेंगे।

अयादि सन्धि- एचोऽयवायावः- एच् (ए, ओ, ऐ, औ) को क्रमशः अय्, अव्, आय्, आव् हो बाद में अच् (कोई भी स्वर वर्ण) होने पर।

ने + अनम् = नयनम्

पो + अनः = पावनः

गै + अकः = गायकः

पौ + अनः = पावनः

पूर्वरूप सन्धि-एङः पदान्तादति- यदि पद के अन्त में एङ् (ए, ओ) आए और उसके बाद ह्रस्व 'अ' आए तो दोनों के स्थान पर पूर्वरूप सन्धि होती है तथा 'अ' की स्पष्टता के लिए अवग्रह(ऽ) का चिन्ह हो जाता है।

अन्ते + अपि = अन्तेऽपि

सो + अवदत् = सोऽअवदत् 

पररूप सन्धि- एङि पररूपम्- अकारान्त उपसर्ग के बाद एङ् (ए, ओ) वाली धातुएँ बाद में हों तो  पररूप (बाद वाला रूप)का आदेश हो जाता है।

 प्र+ एजते = प्रेजते

उप + ओषति उपोषति।

ध्यान देने वाली बात है कि प्रेजते के 'प्र' में 'अ' है और 'उप' में भी 'अ' है तो यहाँ वृद्धि सन्धि भी हो सकती है, किन्तु यहाँ 'प्र' और 'उप' उपसर्ग होने के कारण वृद्धि सन्धि न होकर पररूप सन्धि ही होगी। यदि उपसर्ग न होता तो नियमतः वृद्धि सन्धि होती ।

कल व्यंञ्जन सन्धि का पुनः अभ्यास कर करेंगे।

अभ्यास प्रश्न- हल-

सन्धि विच्छेद करो-

नयनम् = ने + अनम्

शयनम् = ने + अनम्

दायकः = दै + अकः

गायकः = गै + अकः

पवित्रः = पो + इत्रः

पावकः = पौ + अकः

भावुकः = भौ + उकः

वनेऽत्र = वने + अत्र

कोऽपि = को + अपि

प्रेषयति = प्र + एषयति

      

तकनीकी सहयोगी एवं प्रमुख सहयोगी- #माया_त्रिपाठी #भदोही

एवं

#जुगल_किशोर_त्रिपाठी #झाॅंसी 


संकलन:- #टीम_मिशन_शिक्षण_संवाद

#दैनिक_संस्कृत_शिक्षण


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