154/2025, बाल कहानी- 20 सितम्बर
बाल कहानी - दीपू की आदत
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मोहन शहर में प्राइवेट नौकरी करता था। मोहन और राधा के दो बच्चे थे- दीपू और सोनम। उसके साथ उसके माता-पिता भी रहते थे। दीपू और सोनम को घर के सभी लोग बहुत प्यार करते थे। दीपू की उम्र आठ वर्ष और सोनम की उम्र बारह वर्ष थी।
दीपू सबका लाड़ला था। वह कक्षा दो में पढ़ता था। दीपू मन लगाकर पढ़ाई करता था। स्कूल का सारा काम भी करता था, पर उसने एक गलत आदत अपना ली थी। अक्सर वह घर की चीजों को छुपा देता था। जब घर के सदस्य उस चीज को ढूँढते और वह उन्हें न मिलती तो दीपू जोर-जोर से हँसता। घर के सदस्य उसकी इस आदत से बहुत परेशान हो गए थे। आज दीपू ने पापा की जरूरी फाइल कहीं छुपाकर रख दी थी। घर के सभी सदस्य ढूँढने में लगे थे, पर किसी को भी फाइल नहीं मिली । पापा बहुत परेशान हो गए। बाद में वह फाइल दीपू के स्कूल बैग में मिली।
माँ ने उसे बहुत समझाया, बेटा! तुम्हारे ऐसा करने से बहुत से जरूरी काम रुक जाते हैं और घर के सभी सदस्य भी बहुत परेशान होते हैं। तुमको ये आदत छोड़ देना चाहिए।" पर दीपू को तो जैसे इन कार्यों में बहुत मजा आने लगा था। दीपू को यह सब खेल लग रहा था।
दीपू और सोनम की अर्धवार्षिक परीक्षाएँ चल रही थी। आज दीपू की नोट-बुक नहीं मिल रही थी।कल उसकी परीक्षा थी। दीपू बहुत परेशान हो गया। उसने कॉपी ढूँढने के लिए घर के सदस्यों से मदद माँगी, पर उसकी मदद किसी ने नहीं की। मम्मी ने सोचा, "आज अवसर है, क्यों न दीपू को उसी की भाषा में समझाया जाये।"
सुबह से शाम हो गई। अब दीपू बहुत परेशान हो गया। तब माँ ने दीपू को समझाया, "बेटा! जिस तरह तुम्हें यह परेशानी हो रही है, ऐसे ही जब तुम दूसरों की चीजों को छुपा देते हो तो सभी लोग परेशान होते हैं।"
दीपू को अपनी गलती का एहसास हुआ। माँ ने उसकी कॉपी ढूँढने में मदद की। अपनी कॉपी पाकर दीपू बहुत खुश हो गया। उसने वादा किया कि, "आज के बाद वह कभी दूसरों की चीजों को नहीं छुपायेगा और अपनी गलत आदत छोड़ेगा।
#संस्कार_सन्देश -
हमें जरूर चीजों को छुपाकर नहीं रखना चाहिए। इससे सभी लोग परेशान होते हैं। हमें गलत आदतों को नहीं अपनाना चाहिए।
कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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