156/2025, बाल कहानी- 23 सितम्बर
बाल कहानी- दयावान मोनू
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किसी गाँव में मोनू नाम का लड़का था। वह रोज स्कूल से आकर अपनी गाय और बकरियों को जंगल में घास चराने के लिए ले जाता था। इधर गाय-बकरियाँ घास चरती, उधर मोनू तितली को पकड़ने को धुन में दौड़ता। कभी घाटी में चिल्लाता, फिर उसी आवाज को सुनकर खुश होकर ताली बजाता।
रोज की तरह मोनू एक दिन जंगल से घर आ रहा था, अचानक उसने देखा कि एक चिड़िया जमीन पर फड़फड़ा रही थी। इस वजह से वह उड़ नहीं पा रही थी।
मोनू ने उसे झट अपने हाथों में उठा लिया और और अपने घर ले आया। मोनू की दादी ने चिड़िया पर हल्दी का लेप लगाया। मोनू ने रूई से चिड़िया के मुँह में पानी डाला।
एक-दो दिन बाद चिड़िया ठीक हो गई और खुश होकर ऊँचे आकाश में उड़ गई। चिड़िया अब रोज मोनू के आम के पेड़ पर बैठती और चीं- चीं कर मोनू से बातें करती ।
#संस्कार_सन्देश -
इस कहानी से हमें जीवों के प्रति सहानुभूति और सम्मान की भावना विकसित करने की प्रेरणा मिलती है।
रचनाकार-
#दमयन्ती_राणा (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी
कर्णप्रयाग, चमोली (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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