142/2025, बाल कहानी- 03 सितम्बर


बाल कहानी - एक व्यक्ति और विभिन्न लक्ष्य
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रघुवीर सरकारी स्कूल में अध्यापक थे, हालाँकि अब वह सेवा-निवृत्त हो चुके हैं, लेकिन फिर भी गाँव के स्कूल में एक-दो घन्टे बच्चों को पढ़ा न लें, एकाध कहानी, कविता न सुना दें, या एकाध गतिविधि न करा दें तब तक उन्हें शान्ति और सन्तुष्टि नहीं मिलती। इस तरह विद्यालय में रोज आकर पढ़ाना उनका रोज का कार्य था। सभी अध्यापक और ग्राम प्रधान तथा ग्रामवासी उनकी शिक्षण के प्रति जिज्ञासा से बहुत खुश और आश्चर्यचकित थे। वह अप्रैल और जुलाई माह में शिक्षकों के गाँव में जाते और लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करते और अपने बच्चों को स्कूल भेजने को कहते।
वह स्कूल की रैलियो, प्रभात-फेरियों, मासिक बैठकों में प्रतिभाग करते और बी० एल० ओ० के साथ भी गाँव में जाकर मतदाता सूची में नाम बढ़वाने, कटवाने और संशोधन करने हेतु लोगों को समझाने में उनकी मदद करते। ग्राम पंचायत चुनाव हेतु मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान में भी उसके साथ घर-घर जाते और कार्य कराते। पूरे विद्यालय परिवार और समस्त ग्रामवासियों को इन पर गर्व था।
समय गुजरा। हवाओं को खबर थी और ये खबर अधिकारियों तक पहुँचते देर न लगी। पन्द्रह अगस्त ब्लाॅक स्तर पर और छब्बीस जनवरी को जिला स्तर पर उन्हें सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान से पुरस्कृत किया गया। इनके कवि और लेखन कार्य की चर्चा तो पूरे देश की साहित्यिक संस्थाओं में पहले ही फैली हुई थी। ये आनलाइन कवि-सम्मेलन और ऑफलाइन कवि-सम्मेलनों में ये हमेशा समय-समय पर प्रतिभाग करते और साझा-संकलनों तथा विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के लिए रचनायें भेजते और निरन्तर सम्मानित होते। निपुण लक्ष्य के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षामन्त्री द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया था। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं, जिसमें कहानी, कविता और गीत संग्रह, प्रेम छन्द काव्य, आधुनिक शिक्षण और नवीन गतिविधियाँ प्रकाशित हो चुकी थीं। सभी बच्चे और शिक्षक इनका लाभ उठा रहे थे। इन्हें तीन बार शिक्षण कार्य के दौरान कहानी में आदर्श शिक्षक का पुरस्कार मिल चुका था। आकाशवाणी से हर माह इनकी कहानी प्रसारित होती हैं। इनके आलेख बहुत ही प्रशंसनीय और प्रेरणादायक होते हैं।
आज सत्रीय समापन और नये सत्र की शुरुआत पर ग्राम प्रधान द्वारा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें सभी क्षेत्रीय शिक्षक, वकील, अधिकारी और कुछ सन्त पुरुष भी उपस्थित हुए थे। कार्यक्रम में सम्मानित होने के बाद रघुवीर जी ने कहा, "मैं जो कुछ भी हूँ, वह आप सभी की कृपा और आशीर्वाद तथा सहयोग से ही हूँ। एक व्यक्ति अगर साहस और धैर्य को बनाये रखे और बिगड़ती परिस्थितियों में विचलित न हो तथा लक्ष्य पर सतत ध्यान केन्द्रित हो तो वह कभी बिना मन्जिल को पाये रुक नहीं सकता। वह निश्चय ही जो चाहेगा, वह पा सकता है। इसका जीता-जागता उदाहरण मैं हूँ। पन्द्रह वर्ष अस्वस्थता से घिरा रहकर भी निरन्तर गतिशील रहकर, सबको साथ लेते हुए चलने से निश्चित ही मैंने कभी अपने को अकेला नहीं पाया है। आप सभी अपने बच्चों को पढ़ायें, संस्कारित करें और लक्ष्य के प्रति सदा जागरूक रहने को कहें। विनम्रतापूर्वक, अहिंसात्मक तरीके से ही सब कुछ पाया जा सकता है और सबको अपना बनाया जा सकता है। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार!" गड़गड़ाती हुई तालियों से चारों ओर का वातावरण गुंजायमान हो रहा था। सभी हर्षित होकर एक-दूसरे से बहुत कुछ कहते हुए दिखाई दे रहे थे। रघुवीर लोगों से घिरे हुए बधाइयाँ बटोर रहे थे। उनकी विनम्रता और निरहंकारिता देखते ही बनती थी।

#संस्कार_सन्देश-
संस्कार और विनम्रतापूर्वक लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करने से हम रघुवीर सर की तरह सभी कुछ प्राप्त कर सकते हैं।

रचनाकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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