146/2025, बाल कहानी- 10 सितम्बर


बाल कहानी- चिड़िया की होशियारी
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एक चिड़िया और एक बन्दर दोनों एक ही ऊँचे से पेड़ पर रहते थे। दोनों साथ-साथ ही भोजन की तलाश में सुबह निकल जाते, शाम को आते थे। 
अब बरसात का समय नजदीक आ गया था। चिड़िया ने अपने लिए घोंसला बनाना शुरू कर दिया। उसने बन्दर से भी कहा कि, "अपने लिए पेड़ पर घर बना ले।" बन्दर बस, मस्ती, उछल-कूद मचाने के अलावा कुछ नहीं करता था। चिड़िया ने फिर समझाया कि, "अगर वह इसी तरह मस्ती में रहा तो अपने बच्चों को कहाँ रखेगा बरसात में ?"
बन्दर उसकी बात को अनसुना कर, लगा उछलने, छलाँग लगाने। चिड़िया का घोंसला कुछ दिन की लगातार मेहनत से तैयार हो गया। अब चिड़िया ने अण्डे दिए। कुछ दिन बाद तीन छोटे-छोटे बच्चे अण्डे से निकल आये। चिड़िया आराम से उनके साथ घोंसले में रहती थी। 
अब बन्दर ने भी एक बच्चे को जन्म दिया। वह बच्चा बरसात में भीगता रहा और बीमार पड़ गया। बन्दर को कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि क्या करे? बन्दर और उसके छोटे बच्चे की हालत देखकर चिड़िया को बड़ी दया आई। उसने अपनी सहेली दर्जी चिड़िया को बुलाया और बन्दर से कहा कि, "वह पेड़ से खूब सारी पत्तियों वाली टहनियों को इस प्रकार पेड़ पर रख दे, जिससे उसकी सहेली दर्जी चिड़िया पत्तियों को सिलकर एक घर सा बन्दर और उसके बच्चे के लिए बना दे।" दर्जी चिड़िया ने अच्छा सा पत्तियों का घर पेड़ के ऊपर बना दिया। अब बन्दर उसमें अपने बच्चे के साथ रहने लगा। बन्दर ने समय पर घर बनाने की चिड़िया की सलाह न मानने के लिए माफी माँगी और चिड़िया की होशियारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि, "भविष्य में वह उस उपकार का बदला जरूर चुकायेगा।"

#संस्कार_सन्देश -
परिस्थितियों को ध्यान में रखकर हमें अपने हित की बात माननी चाहिए, अगर कोई हमें बताये तो हमें उसकी बात और कार्य पर जरूर ध्यान देना चाहिए।

कहानीकार-
#भावना_पाण्डे (स०अ०)
राजकीय प्राथमिक विद्यालय
कठघरिया, हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखण्ड)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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