जमाना दौड़ रहा है
गंगा की जलधार की भाँति,
अपने उद्गम से अविरल,
कभी धवल तरंगों को लिए,
तो कभी मैला-कुचैला होकर।
अथक गोमुख से गंगासागर तक,
काश्मीर से कन्याकुमारी तक,
उत्तरीय ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक,
जमाना दौड़ रहा है।
जमाने की इस दौड़ में,
खप रही है प्रकृति,
खर्च हो रहा है भण्डार युगों का,
प्रकृति लुटाए जा रही है।
जमाना लूटने में मशगूल है,
लुट रहा है सत्य, लुट रही है,
अहिंसा, लुट रही है मानवता,
किन्तु जमाना कृतघ्न होकर।
लूटे जा रहा है -लूटे जा रहा है,
लुट रही है जैव-विविधता,
सघन वन-कानन लुट -लुटकर,
रह गये हैं मुठ्ठी भर।
जमाने को सख्त जरूरत है,
प्राण वायु की, किन्तु-
जमाना प्राणवायु दाता के ही,
प्राण लिए जा रहा है।
जमाने की यह दौड़ अथक है,
बेशक इसी तरह दौड़ता रहा,
जमाना, चक्रवत पृथ्वी भी आग,
गोला बन जाएगी पूर्व की भाँति।
रचयिता
माधव प्रसाद नौटियाल (शास्त्री),
सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कल्डियाणीज़
विकास खण्ड-भटवाड़ी,
जनपद-उत्तरकाशी,
उत्तराखण्ड।
अपने उद्गम से अविरल,
कभी धवल तरंगों को लिए,
तो कभी मैला-कुचैला होकर।
अथक गोमुख से गंगासागर तक,
काश्मीर से कन्याकुमारी तक,
उत्तरीय ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक,
जमाना दौड़ रहा है।
जमाने की इस दौड़ में,
खप रही है प्रकृति,
खर्च हो रहा है भण्डार युगों का,
प्रकृति लुटाए जा रही है।
जमाना लूटने में मशगूल है,
लुट रहा है सत्य, लुट रही है,
अहिंसा, लुट रही है मानवता,
किन्तु जमाना कृतघ्न होकर।
लूटे जा रहा है -लूटे जा रहा है,
लुट रही है जैव-विविधता,
सघन वन-कानन लुट -लुटकर,
रह गये हैं मुठ्ठी भर।
जमाने को सख्त जरूरत है,
प्राण वायु की, किन्तु-
जमाना प्राणवायु दाता के ही,
प्राण लिए जा रहा है।
जमाने की यह दौड़ अथक है,
बेशक इसी तरह दौड़ता रहा,
जमाना, चक्रवत पृथ्वी भी आग,
गोला बन जाएगी पूर्व की भाँति।
रचयिता
माधव प्रसाद नौटियाल (शास्त्री),
सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कल्डियाणीज़
विकास खण्ड-भटवाड़ी,
जनपद-उत्तरकाशी,
उत्तराखण्ड।

बेहतरीन
ReplyDeleteसादर आभार एवं अभिवादन
Deleteबहुत सुंदर,👌👌
ReplyDeleteसादर आभार एवं अभिवादन
Deleteबहुत बेहतरीन व प्रकृति को दर्शाती कविता👌👌👌
ReplyDeleteसादर आभार एवं अभिवादन
DeleteVery nice sir g
ReplyDeleteसादर आभार एवं अभिवादन
Deleteमिशनशिक्षणसंवाद परिवार का हृदय की अनन्त गहराई से धन्यवाद एवं विशेष आभारी हूँ मिशनशिक्षणसंवाद के राज्य एवं जनपद संयोजकों का सादर धन्यवाद
ReplyDeleteसादर आभार एवं अभिवादन
ReplyDeleteवर्तमान परिक्षेप्य में सुदंर रचना
ReplyDeleteजी धन्यवाद
Deleteबहुत सुन्दर वर्णन
ReplyDeleteसादर आभार 👃👃👃
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