बड़ों का सम्मान करो

मेहनत करके माता -पिता,
काबिल बच्चों को बनाते हैं।
और पढ-़लिखकर संतान ही,
उन्हें बोझ समझने लगते हैं।

     माता-पिता की अनदेखी,
     क्यों संतान करती है..?
     कहीं-कहीं तो आज भी,
     तीन पीढ़ी साथ में रहती हैं।

शहरों और गाँवों में भी,
माँ-बाप अकेले रहते हैं।
पढी़- लिखी संतान भी,
उनके हाल पर छोड़ देते हैं।

      तिनका -2 जोड़कर
      बड़े आशियाना बनाते हैं।
      व्यथित होता है हृदय जब,
      वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं।

बुढ़ापा है एक अवस्था,
युवाओं को समझना होगा।
जिस उम्र में हैं मात-पिता,
कल तुम्हें गुजरना होगा।

      बड़े बुजुर्गों के कदमों में,
      ही तो जन्नत होती है।
      नादान होते हैं वो बच्चे,
      जिन्हें ये समझ नहीं होती है।

माता-पिता का तिरस्कार,
जो भी युवा करते हैं।
माने चाहे ना माने,
अपराध बड़ा वो करते हैं।

       बोझ नहीं हैं माता-पिता,
       मान-सम्मान के अधिकारी हैं।
       ये ही तो, जग में जिसने,
       तुम पर खुशियाँ वारी हैं।
   
रचयिता
बबली सेंजवाल,
प्रधानाध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गैरसैंण,
विकास खण्ड-गैरसैंण 
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

Comments

  1. बहुत सुन्दर रचना

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  2. सुन्दर रचना 👌

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  3. मैम अपने वर्तमान परिस्थिति को शब्दों में उतारा है।बहुत सुन्दर🙏🙏।
    पर मुझे लगता है कि यह स्थिति वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की है।जिसमें सदाचार, सम्मान, अनुशासन और नैतिकता को उचित स्थान नही मिला।

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