मेरे आदर्श

आओ दोस्तों अपने जीवन
का एक राज बताऊँ
मेरा जीवन जिनसे प्रेरित
उनसे तुम्हें मिलवाऊँ।

वो हीरो हैं या हैं ईश्वर
या कोई सुपरस्टार
मैं तो बस इतना जानूँ कि
वो हैं कोई अवतार।

मेरी इच्छा पूरी कर दे
बिन माँगे सब पाया
सच कहती हूँ मित्रों मैंने
इनके चरणों मे सब पाया।

मेरी खुशी में हँसते थे
और मेरे दुःख में रोते
रोज नए-नए सपने वो
मेरी आँखों में संजोते।

उनके दम पर मेरी हस्ती
अँगुली पकड़ जग नापा
सुनो दोस्तों वो कोई और नहीं
वो हैं मेरे पापा।

मेरे पापा मेरे आदर्श
उनके पदचिन्हों पर चलकर
महसूस हमेशा करती हूँ कि
उनका हाथ है सिर पर।।

रचयिता
सीता टम्टा,
प्रधानाध्यापिका,
रा०प्रा०वि० सारेग्वाड़,
संकुल- गैरसैंण,
विकास खण्ड- गैरसैंण,
जनपद- चमोली,
उत्तराखण्ड।

Comments

  1. बहुत सूदंर रचना ।

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  2. बेहतरीं कविता👌👌👌

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  3. Soooo good. Loved it from start to finish.

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  4. बहुत बहुत धन्यवाद

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  5. सुंदर रचना,,👌👌🌻🌻

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  6. सुन्दर रचना

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  7. बहुत सुन्दर रचना बहिन जी।

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  8. वाकई बहुत शानदार रचना है आपकी

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  9. बहुत सुन्दर रचना

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  10. बहुत ही सुंदर कविता।💐🌟🙏🙏🙏🌟💐

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