विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस
बुजुर्ग हमारे घर की नींव की ईंट कहलाते हैं,
संस्कारों का पाठ हमें, अक्सर वही सिखाते हैं।
उनके साथ दुर्व्यवहार उचित नहीं होता है,
हमारे संस्कारों का प्रतिपल हनन होता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने की, इस दिवस की शुरूआत,
जून 2006 मे मान्यता मिली, करो इसे आत्मसात।
15 जून को प्रतिवर्ष इसे मनाया जाता,
चिंतन कराना हमको, इसका लक्ष्य बताता।
भूल गए हम अपना बचपन, दादा-दादी संग खेले,
अति व्यस्तता के कारण, हम शिष्टता को भूले।
बुजुर्ग दुर्व्यवहार समस्या विकसित और विकासशील की,
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही, संख्या ऐसे लोगों की।
मनोवैज्ञानिक, वित्तीय, शारीरिक, ये दुर्व्यवहार के प्रकार,
11 वी पंचवर्षीय योजना में समाधान को आकार।
राष्ट्रीय बुजुर्ग, स्वास्थ्य देखभाल, कार्यक्रम हुआ प्रारम्भ,
आशा की एक किरण का, हुआ एक आरम्भ।
सामाजिक, न्याय ससशक्तीकरण मंत्रालय, करते हैं क्रियान्वयन,
गृह मंत्रालय, राजस्व विभाग, लगे हैं करने कल्याण।
स्वयं को दुर्व्यवहार, उपेक्षा और शोषण से बचाएँ,
बुजुर्गो का सम्मान करें, अपनी सभ्यता को न मिटाएँ।।
संस्कारों का पाठ हमें, अक्सर वही सिखाते हैं।
उनके साथ दुर्व्यवहार उचित नहीं होता है,
हमारे संस्कारों का प्रतिपल हनन होता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने की, इस दिवस की शुरूआत,
जून 2006 मे मान्यता मिली, करो इसे आत्मसात।
15 जून को प्रतिवर्ष इसे मनाया जाता,
चिंतन कराना हमको, इसका लक्ष्य बताता।
भूल गए हम अपना बचपन, दादा-दादी संग खेले,
अति व्यस्तता के कारण, हम शिष्टता को भूले।
बुजुर्ग दुर्व्यवहार समस्या विकसित और विकासशील की,
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही, संख्या ऐसे लोगों की।
मनोवैज्ञानिक, वित्तीय, शारीरिक, ये दुर्व्यवहार के प्रकार,
11 वी पंचवर्षीय योजना में समाधान को आकार।
राष्ट्रीय बुजुर्ग, स्वास्थ्य देखभाल, कार्यक्रम हुआ प्रारम्भ,
आशा की एक किरण का, हुआ एक आरम्भ।
सामाजिक, न्याय ससशक्तीकरण मंत्रालय, करते हैं क्रियान्वयन,
गृह मंत्रालय, राजस्व विभाग, लगे हैं करने कल्याण।
स्वयं को दुर्व्यवहार, उपेक्षा और शोषण से बचाएँ,
बुजुर्गो का सम्मान करें, अपनी सभ्यता को न मिटाएँ।।
रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,

Comments
Post a Comment