एक दान ...जीवन के नाम

रक्तदान से जीवन मिलता
मुरझाया सा जीवन खिलता।
कर सको तो, करना ये काम
पुण्य भरा है काम महान।
सेहत का अपने रखना ध्यान
रक्त रहे स्वस्थ और ऊर्जावान।
रक्त में ना हो जब कोई विकार
तभी करो तुम ये उपकार।
हृदय रोग या बी. पी. हो
या हो मधुमेह का मधु अपार
रक्तदान ना करना तुम,
स्वयं करो तुम योग और ध्यान।
क्या अपना और क्या है पराया
सबका एक ही रंग है लाल।
ऊँच ना देखे, नीच ना देखे
सबके मन का भेद ना देखे।
जाति पाँति का बैर ना जाने
सबके हिय में एक ही धार
है सबके जीवन की पतवार।
तुझमें भी लाल मुझमें भी लाल
फिर कहे का भेद मलाल।
ना हिन्दू ना मुस्लिम देखे
ना देखे ये सिख ईसाई
इसके लिए तो प्रभु ने रचाई,
तुम सब मिल हो भाई भाई।
कर दो अपने लहू का दान
इससे बढ़कर ना कोई दान।
होता जग में सबका कल्यान
जीवन बनता इससे महान।
रक्तदान ना करे जो कोई?
तो कैसे रक्त-बैंक बनेंगे?
कैसे मिलेगा लहू उन्हें जब!!
जीवन-प्राण अधर में होंगे
मृत्यु -शैय्या पर रहे जो कोई?
तब ये बूँद संजीवनी होगी।
करो मानवता का सद्काम
इंसानियत का है काम महान।
पर सेवा पर उपकार करो तुम
रक्तदान से जीवन दान करो तुम।
महान नहीं इन्सान बनो तुम
धरती के कर्ण महान बनो तुम
धरती के कर्ण महान बनो तुम।।
           
रचयिता
मंजरी सिंह,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उमरी गनेशपुर,
विकास खण्ड-रामपुर मथुरा,
जनपद-सीतापुर।

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