बेटियाँ वो जो

बेटियाँ वो जो हमारी हैं,
वसुधा की जो प्यारी हैं।
यों सिर उठाये जो हिमाला है,
तो बेटियाँ हिमाला का मुकुट हैं।।

वसुधा की गोद में बचपन से खेली है,
वसुधा के आँचल में प्यार से सोती है।
बेटियाँ हमारी दृढ़निश्चयी होती हैं,
बाधाओं के तूफान को पलकों से झेलती है।।

 बढ़ती है बेटी दृढ़ संकल्प लेती है,
ना गति रोके न धरती टोके बढ़ती है।
यदि बदला जाए दृष्टिकोण को,
तो बदल देगी बेटी संसार को।।

नजर आयेंगे उसी में और दर्शन पायेंगे,
पार्वती, लक्ष्मी, भवानी, सरस्वती व नवदुर्गे।
जब-जब पूजा हुई बेटी रुपी शक्ति  की,
तब-तब धरती प्रफुल्लित हुयी उसकी।।

इसलिए हे मानव  पहचान ले कल्याणी को,
बदल लें अपनी भावना और दृष्टिकोण को।
पवित्र गंगा सम उससे कल्याण होगा निश्चित,
यदि पहचान लेगा वसुंधरा को हे अपरिचित।।

बेटियाँ वो जो  कल्याणी जगत की।
बेटियाँ वो जो हमारी हैं, वसुंधरा की जो प्यारी हैं।।

रचयिता
उषा गौड़,
सहायक अध्यापक,
रा0 पू0 मा0 वि0-डोईवाला,
विकास खण्ड-डोईवाला,
जनपद-देहरादून,
उत्तराखण्ड।

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