कबड्डी

खेल कबड्डी सुनते ही,
बच्चे खुश हो जाते हैं।
हम भी खेलेंगे खेलेंगे,
कहते हमसे जाते हैं।।
    खेल कबड्डी....

न्यारा कैसा खेल कबड्डी,
सब मिल धूम मचाते हैं।
राजू, पिंकी, चिंटू सब मिल
अपनी- टीम बनाते हैं।।
         खेल कबड्डी....

छल कबड्डी, छल कबड्डी,
कहते सब खो से जाते हैं।
इसको मारा देखो पकड़ा,
बात यही बतलाते हैं।।
        खेल कबड्डी....

भारत का है खेल कबड्डी
जन प्रिय हो समझाते हैं।
विश्व में नाम कबड्डी हो,
हम ऐसे स्वप्न सजाते हैं।।
            खेल कबड्डी....

रचयिता
नवनीत शुक्ल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैरवां द्वितीय,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।

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