चिट्ठी
चिट्ठी खो गई तू,
गुमनामी में
कितना स्नेह,
कितना प्यार
कितनी भावनाओं में,
सराबोर तेरा तन
हुआ करता था,
कभी तू नम कर देती
थी आँखों को
खबर फ़िक्र की लाकर,
तो सुकून दिलों को
खुशी चेहरों को
दे जाती थी तू ही,
अपनों का प्यार
जरूरी संदेश,
तेरे पन्नों में
लिपटा हुआ करता था
सुना इंसा ने अपनी
जरूरतें बदल दीं,
कहते हैं तरक़्क़ी
बहुत कर ली
सुना सब पास हैं
रोज संदेशे आस पास हैं
तब भी हैं दूरी
समय की मजबूरी,
मिठास जो भाव तेरे
शब्दों से मिलता था,
रोज के सन्देशों में भी नहीं
भले देर से पहुँचती
आशाएँ बाँधे रखती
सफलता की कहानी कभी,
उद्गार मन के जताती
संदेशे जरूरी अनेक
लग कर सीने से तू,
कितने बता जाती
इंसानियत खो रही
जैसे इंसानों में
वजूद भी ग़ुम तेरा
हो गया जमाने में।
रचयिता
जया चौधरी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलखिला मलारी,
विकास खण्ड-जोशीमठ,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
गुमनामी में
कितना स्नेह,
कितना प्यार
कितनी भावनाओं में,
सराबोर तेरा तन
हुआ करता था,
कभी तू नम कर देती
थी आँखों को
खबर फ़िक्र की लाकर,
तो सुकून दिलों को
खुशी चेहरों को
दे जाती थी तू ही,
अपनों का प्यार
जरूरी संदेश,
तेरे पन्नों में
लिपटा हुआ करता था
सुना इंसा ने अपनी
जरूरतें बदल दीं,
कहते हैं तरक़्क़ी
बहुत कर ली
सुना सब पास हैं
रोज संदेशे आस पास हैं
तब भी हैं दूरी
समय की मजबूरी,
मिठास जो भाव तेरे
शब्दों से मिलता था,
रोज के सन्देशों में भी नहीं
भले देर से पहुँचती
आशाएँ बाँधे रखती
सफलता की कहानी कभी,
उद्गार मन के जताती
संदेशे जरूरी अनेक
लग कर सीने से तू,
कितने बता जाती
इंसानियत खो रही
जैसे इंसानों में
वजूद भी ग़ुम तेरा
हो गया जमाने में।
रचयिता
जया चौधरी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलखिला मलारी,
विकास खण्ड-जोशीमठ,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

Bahutt sundarr👍
ReplyDeleteबहुत सुदंर रचना
ReplyDelete😘vryy nicee..😘 keep goingg
ReplyDelete👏👏👏👏
ReplyDeleteअद्भुत रचना 👌👌👌💐💐
ReplyDeleteअनुपम कृति। शानदार।
ReplyDeleteबहुत सुन्दर जी.. वास्तविकता भावनाओं की.. 🙏🌹
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteपुरानी यादों को अपने में संजोये अद्भुत कविता👌👌👌🌷💐
ReplyDeleteबहुत सुन्दर
ReplyDeleteबहुत सुन्दर
ReplyDeleteWoW very nice poem 👏👏👏👏👏👏
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