रक्तदाता महादाता

मानव कर कुछ ऐसा काम,
जीवन में बन सके महान,
जीवन अर्पित परसेवा में,
कर थोड़ा सा रक्तदान।

जीने का सबको अधिकार,
मानव कर इतना उपकार
यदि कर ले तू रक्तदान,
बच सकेगी किसी की जान।

कोई एक परिवार बचाकर,
तू इस मानव देह में आकर,
महामानव तू बन जाएगा,
जब कोई प्राण बचाएगा।

होगा दधीचि सा तेरा दान,
तुझ सा होगा कौन महान?
देगा दुआएँ कोई लाचार,
करना तू थोड़ा सा विचार।

रक्तदान है महादान,
बच पाएँगे कई प्राण,
महादानी है रक्तदाता,
बनो किसी का भाग्य विधाता।

दान पुण्य में नहीं मुक्ति है,
यह सबसे अच्छी युक्ति है,
धनदौलत सब है फरेब,
रक्तदाता सा कोई न नेक।

मत घबराना रक्तदान से,
यह तो फिर बन जाएगा,
मिलें दुवाएँ जान बचाकर,
निज जीवन तू पर इठलाएगा।

रचयिता
जानकी दानू,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय थनगीरा,
संकुल-कुराड़,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

Comments

  1. बहुत सुंदर कविता👌👌👌👌

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  2. मिशन शिक्षण संवाद में मेरी कविता को स्थान देने हेतु मिशन शिक्षण संवाद टीम का बहुत-बहुत आभार और धन्यवाद।

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    1. बहुत ही सरहनीय सोच के साथ शुभकामनाऐं

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  3. बहुत बेहतरीन

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  4. बहुत सुन्दर रचना

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