विश्व महासागर दिवस
अपनी ही लहरों में चलता है सागर।
हवाओं की तरह मचलता है सागर।।
इसकी गहराई को कोई माप ना पाया।
कहाँ से शुरू, कहाँ खत्म होता है सागर।
अपनी गहराई में कितने राज छुपाए।
ऊपर से कितना शान्त रहता है सागर।।
धरती को चहुँओर से घेरे हुए है।
फिर भी घमण्ड नहीं दिखाता है सागर।।
कितना खारे पानी को समेटे हुए है।
फिर भी जीव जन्तुओं को भाए है सागर।।
एक देश को दूसरे देश से जोड़े हुए है।
ऐसा रास्ता हमको देता है सागर।।
रचयिता
कमलेश प्रसाद वर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रिकेबीपुर,
विकास खण्ड-रामपुर,
जनपद-जौनपुर।
हवाओं की तरह मचलता है सागर।।
इसकी गहराई को कोई माप ना पाया।
कहाँ से शुरू, कहाँ खत्म होता है सागर।
अपनी गहराई में कितने राज छुपाए।
ऊपर से कितना शान्त रहता है सागर।।
धरती को चहुँओर से घेरे हुए है।
फिर भी घमण्ड नहीं दिखाता है सागर।।
कितना खारे पानी को समेटे हुए है।
फिर भी जीव जन्तुओं को भाए है सागर।।
एक देश को दूसरे देश से जोड़े हुए है।
ऐसा रास्ता हमको देता है सागर।।
रचयिता
कमलेश प्रसाद वर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रिकेबीपुर,
विकास खण्ड-रामपुर,
जनपद-जौनपुर।

Sundar
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