साइकिल प्यारी-प्यारी
दो पहियों पर सरसर चलती, साइकिल मेरी प्यारी प्यारी,
पवन वेग सी उड़ती चलती, साइकिल मेरी न्यारी- न्यारी,
हवा से बातें करती है जब, पैडल मार चलाऊँ,
जब चाहूँ तब रुक जाती है, जब मैं ब्रेक लगाऊँ,
सुबह-शाम की सैर कराती, खूब मजे लगवाती,
पहियों पर घूम-घूम के, करतब खूब दिखलाती,
चिकनी सड़कों पर चलती है, झूमती और इठलाती,
उबड़- खाबड़ रास्तों पर, चलती है बलखाती,
पगडण्डी पर चलती है, घटा सावन के जैसी,
टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर चलती, चाल नागिन के जैसी,
कीचड़ में न फँसने देती, खुद लथपथ हो जाती है,
रेतीले मैदानों में थोड़ा, रुक-रुक चलती जाती है,
सूखी मिट्टी के मैदानों पर, धूल उड़ाती चलती है
बिन मेरी आज्ञा के, न तो रुकती है न थमती है,
जब, जैसे, जहाँ ले जाऊँ, गिले-शिकवे न करती है,
ढोती है सामान कभी, कभी औरों को बिठा ले जाती है,
कभी एक तो कभी दो, तो कभी तीन साथ ले जाती है,
तपती सड़क या सड़क हो ठण्डी, सब सहती चलती जाती है,
गड्ढों पर भी हिल- डुल करती, सरपट चलती जाती है,
हर हाल में खुशी-खुशी, बस चलती ही जाती है,
बिन ईंधन के चलती है, वातावरण शुद्ध बनाती है,
प्राणों से मुझे प्यारी है, हरदम साथ निभाती है
यातायत के साधनों में, सबसे अलग और निराली है....
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।
पवन वेग सी उड़ती चलती, साइकिल मेरी न्यारी- न्यारी,
हवा से बातें करती है जब, पैडल मार चलाऊँ,
जब चाहूँ तब रुक जाती है, जब मैं ब्रेक लगाऊँ,
सुबह-शाम की सैर कराती, खूब मजे लगवाती,
पहियों पर घूम-घूम के, करतब खूब दिखलाती,
चिकनी सड़कों पर चलती है, झूमती और इठलाती,
उबड़- खाबड़ रास्तों पर, चलती है बलखाती,
पगडण्डी पर चलती है, घटा सावन के जैसी,
टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर चलती, चाल नागिन के जैसी,
कीचड़ में न फँसने देती, खुद लथपथ हो जाती है,
रेतीले मैदानों में थोड़ा, रुक-रुक चलती जाती है,
सूखी मिट्टी के मैदानों पर, धूल उड़ाती चलती है
बिन मेरी आज्ञा के, न तो रुकती है न थमती है,
जब, जैसे, जहाँ ले जाऊँ, गिले-शिकवे न करती है,
ढोती है सामान कभी, कभी औरों को बिठा ले जाती है,
कभी एक तो कभी दो, तो कभी तीन साथ ले जाती है,
तपती सड़क या सड़क हो ठण्डी, सब सहती चलती जाती है,
गड्ढों पर भी हिल- डुल करती, सरपट चलती जाती है,
हर हाल में खुशी-खुशी, बस चलती ही जाती है,
बिन ईंधन के चलती है, वातावरण शुद्ध बनाती है,
प्राणों से मुझे प्यारी है, हरदम साथ निभाती है
यातायत के साधनों में, सबसे अलग और निराली है....
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।


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