मैं पेड़ हूँ

मैं पेड़ हूँ! मैं पेड़ हूँ!
मैं देवों का देव हूँ,
मैं पेड़ हूँ, मैं पेड़ हूँ।

मैं पेड़ हूँ, जन -जीवन को मैं चला दूँ,
बंजर को हरियाली से भर दूँ,
पर्यावरण को खुशहाल बना दूँ।

मिट्टी को बाँधने वाला,
बाढ़ को रोकने वाला,
जन जीवन में ऑक्सीजन भरने वाला,
पर्यावरण को संतृप्त करने वाला,
मैं पेड़ हूँ! मै पेड़ हूँ।

प्रदूषण चाहे मिटटी, पानी, हवा का हो,
कर देता है जीवन को विह्वल,
बचाव का एकमात्र मार्ग है अविचल,
पेड़ लगाओ पेड़ लगाओ हर पल।

लकड़ी देता कागज देता,
फल देता, औषधि देता,
सबसे महत्वपूर्ण श्वांस देता,
जिसके बिना हर जीव, जीवन खो देता।

मैं पेड़ हूँ, पर एक बात मैं कह दूँ,
मानव अपनी अंधी दौड़ में,
मिटा रहा पर्यावरण को होड़ में,
रे मानव मत कर इस पुण्य धरा को ध्वस्त,
ना हो अपनी महत्वाकांक्षाओं में इतना व्यस्त।

मैं केवल पेड़ ही नही हूँ,
श्वांस व प्राण मुझमें भी है,
संवेदनशील मैं भी हूँ,
रे मानव तेरे तिरस्कार से,
कष्ट मुझे भी होता है।

कभी सुनी हो अगर मेरी चीख,
रे मानव! बस लेना ही मत सीख,
जीवन को खुशहाल बनाना है तो,
पेड़ काटना नहीं बल्कि लगाना भी सीख।

पर्यावरण को बचाने का मूलमंत्र,
प्रकृति से मिला लो तुम अपना यंत्र,
पेड़ लगाने का सीखो नया यंत्र,
विश्व पर्यावरण दिवस पर यही है मेरा मंत्र,

मैं पेड़ हूँ! मैं पेड़ हूँ!
मैं देवों का देव हूँ।

रचयिता 
तेजेंदर कौर,
सहायक अध्यापिका,
अंग्रेजी माध्यम मॉडल प्राथमिक विद्यालय बिहारीगढ़,
विकास क्षेत्र-मुज़फ़्फ़राबाद,
जनपद-सहारनपुर।

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