खुशहाल पर्यावरण

नाच रही है प्रकृति आज फिर
जैसे कोई कुशल नर्तक,
 पर्यावरण हुआ फिर खुश
 निर्मल और स्वास्थ्यवर्धक।

लॉकडाउन के दौर ने देखो
 प्रकृति को खुशहाल किया,
  संसाधन सीमित कर मानव ने
  पर्यावरण को निहाल किया।

 अब ना कोई है जल संकट
ना ही कोई प्रदूषण है,
मनमानी करके ऐ मानव
कैसा फैलाया संदूषण है।

ओजोन परत भी दुरुस्त हुई अब
ना ही ग्लोबल वॉर्मिंग है,
जहाँ तपी थोड़ी सी धरती
होती सुंदर बारिश है।

अब न जाने को मन करता
 किसी भी हिल स्टेशन को,
लायी प्रकृति स्वयं ही जैसे
 घर-घर शिमला मसूरी को।

आवश्यकता से अधिक न रखती
 प्रकृति अपने पास कुछ भी,
 ऐसा ही हम भी कुछ सीखें
करे ना संग्रह अधिक कभी।

बेकार पड़ी वस्तुओं को भी
काम में लाना हम सीखें,
कूड़े-कचरे का प्रबंधन
 करना भी हम सीखें।

जैसे हम अपने घर में
सुरक्षित महसूस करते हैं,
वैसे ही जंगल में
 वन्यजीव सुरक्षित रहते हैं।

बढ़ते औद्योगिक विकास ने
इनके आवास को खतरे में डाला।
लुप्त हुए कुछ जीव-जंतु
कुछ को है संकट में डाला।

जिस पर्यावरण में हम रहते
उसके प्रति है जिम्मेदारी,
आओ अब संकल्प करें
निभाएँ अपनी भागीदारी।

खुशहाल रह पाएँगे तभी
जब पर्यावरण खुशहाल होगा,
होगी निहाल धरती
जब मानव संवेदनशील होगा।

विश्व पर्यावरण दिवस पर
आओ एक संकल्प करें,
बढ़े सामाजिक जिम्मेदारी
जन -जन भागीदार बने।

रचयिता
सुमन पांडेय,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरी मनौटी,
शिक्षा क्षेत्र -खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।

Comments

  1. अति सुन्दर पंक्तियां, मन को छू गई।

    ReplyDelete

Post a Comment

Total Pageviews