टपका का डर

कक्षा -2
विषय -हिंदी
पाठ - 5 
टपका का डर

जब जोर-जोर से, हो रही बरसात थी।
बूढ़ी दादी माँ तब, बहुत परेशान थीं।।
एक टूटा सा छप्पर, वो भी बहुत पुराना।
बरसात में भीग रहा, दादी का आशियाना।।
आसमान से गिरे ओले, जब बेर से
दादी माँ के छप्पर में, कर दिए छेद से।।
चूल्हे पर दादी माँ, भात बना रही थीं।
छप्पर से टपकी बूँदें, दादी को सता रही थीं।।
तभी बाघ भी दादी के घर, बरसात से बचने आया।
दादी बोली बाघ नहीं, मुझे टपका के डर ने सताया।।
सुना बाघ ने दादी को, तो दुम दुमाकर भागा।
मुझसे भी कोई बड़ जानवर, टपका नाम का आया।।

रचयिता
सुशीला देवी,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय नरहौली प्रथम,
विकास खण्ड व जनपद-मथुरा।

Comments

  1. सभी साथियों को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।🙏🙏

    ReplyDelete
  2. उत्कृष्ट रचना 👏👏👏

    ReplyDelete
  3. बहुत ही उत्कृष्ट एवं सराहनीय कविता👌👌👌

    ReplyDelete
  4. बहुत शानदार एवं लाजवाब प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  5. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete

Post a Comment

Total Pageviews