४६२~ क्षमा सचान (प्र०अ०) प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर, चायल, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश
🏅अनमोल रत्न🏅
मित्रों आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से जनपद - कौशाम्बी से अनमोल रत्न शिक्षिका बहन क्षमा सचान जी से परिचय करा रहे हैं। जिन्होंने अपनी सकारात्मक सोच और व्यवहार कुशलता से सदैव शिक्षा के उत्थान के लिए सतत प्रयास एवं संघर्ष करते हुए अपने विद्यालय को शिक्षण गतिविधियों एवं उपलब्धियों का तथा सामाजिक विश्वास का केन्द्र बना दिया है। जो हम सभी के लिए प्रेरक एवं अनुकरणीय प्रयास हैं।
आइये देखते हैं आपके द्वारा किए गये कुछ प्रेरक और अनुकरणीय प्रयासों को :-
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2668150336795880&id=1598220847122173
1- शिक्षक परिचय :-
क्षमा सचान (प्र०अ०)
प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर,
चायल, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश
वर्तमान विद्यालय में नियुक्ति तिथि - 06/08/13
प्रथम नियुक्ति तिथि :- 21/02/2009
👉1. भूतपूर्व विद्यालय की समस्या :- प्रथम नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय बंधवा रजबर, मंझनपुर कौशाम्बी जिले में सहायक अध्यापक के पद पर हुई। उस समय वहाँ पर बाउंड्रीवॉल नहीं थी, इसलिए विद्यालय में गांव वालों का बहुत हस्तक्षेप रहता था। लगभग एक वर्ष बाद ही मुझे विद्यालय का चार्ज संभालना पड़ा। तब मैंने विद्यालय की समस्या के समाधान हेतु विभाग से चहारदीवारी की मांग की और जल्द ही चहारदीवारी के बनाने की अनुमति मिल गई, किन्तु गांव के कुछ दबंग लोग दीवार नहीं बनाने दे रहे थे, पर मेरी अटल इच्छा शक्ति से तथा काफी संघर्ष के बाद वह चहारदीवारी मैंने निर्मित करवा ही ली। इसके लिए मेरी प्रशासनिक अधिकारियों ने भरपूर सहायता की।
👉2 वर्तमान विद्यालय की समस्याएं :-
1 - नामांकन कम होना।
2- बच्चों की नामांकन के सापेक्ष कम उपस्थिति।
3 - बच्चों का शैक्षिक स्तर कक्षा के अनुरूप न होना।
4 - अभिभावकों का विद्यालय के प्रति जुड़ाव की कमी।
5 - विद्यालय के कक्षा कक्ष का हवादार न होना। (दबंगों द्वारा कक्षा की खिड़की बंद करवाने के कारण)
👉3. समस्या का समाधान :-
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर तथा समय - समय पर बच्चों के द्वारा *स्कूल चलो अभियान रैली* निकलवा कर। घर -घर जाकर अभिभावकों से वार्ता करके विश्वास दिलाया कि हमारे विद्यालय में आपके बच्चों के लिए सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी दी जाती है। इससे हमारे विद्यालय का नामांकन 90 से बढ़कर 150 तक हो गया।
2 - बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार सिखाने का प्रयास किया गया, जब बच्चे अपनी रुचि से सीखना शुरू किया तो उन्हें अच्छा लगने लगा, जिससे कक्षा में बच्चों की उपस्थिति बढ़ गई।
3 - विद्यालय में शिक्षकों की कमी होने के कारण बहु-कक्षीय शिक्षण का उपयोग किया।
4 - बच्चों के अभिभावकों को विद्यालय बुलाकर अतिथि स्वरूप व्यवहार करने से उन्हें भी विद्यालय अच्छा लगने लगा और वे शिक्षकों से जुड़ने लगे।
5 - विद्यालय की एक कक्षा की खिड़की को कुछ दबंग लोगों ने ईटों द्वारा बंद करा दिया था, जिसे मैंने अपने विभाग व SDM को प्रार्थना -पत्र देकर वह खिड़की दोबारा खुलवा ली। यह बच्चों के लिए बहुत आवश्यक था।
👉4. विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियाँ:
1- वैसे मेरे विद्यालय को भूतपूर्व प्र०अ० ने काफी अच्छा बना रखा था। मैंने विद्यालय का और अधिक सौंदर्यीकरण कराकर प्रत्येक कक्षा में T.L.M बनवाए।
2 - कक्षाओं में बच्चों को लैपटॉप स्पीकर आदि से उनके शैक्षिक स्तर के अनुसार शिक्षा दी जाती है।
3 - बच्चों को कक्षा में कहानी, कविता, ज्ञानवर्धक बातों से व अब दीक्षा एप की मदद से भी बच्चों का सर्वांगीण विकास किया जाता है।
4 - विद्यालय में मेरे द्वारा व सहायक अध्यापकों की मदद से बच्चों के बैठने लिए डेस्क - बेंच का इंतजाम किया गया।
5 - मेरे द्वारा विद्यालय में ' *उदीशा* नामक वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन किया गया, जिसमे हमारे विद्यालय के बच्चों ने भरपूर अपने प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
6 - इस वार्षिकोत्सव में आयोजित कार्यक्रम को देखकर विधायक जी द्वारा विद्यालय को वाटर कूलर, प्रोजेक्टर व सोलर सिस्टम देने का वादा किया।
👉5. विद्यालय के बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियाँ :-
1- विद्यालय के बच्चों के द्वारा जिला स्तर कला प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त कर जिलाधिकारी महोदय से पुरस्कार प्राप्त किया।
2- ब्लॉक खेल रैली में बच्चों द्वारा उत्तम प्रदर्शन कर पुरस्कार प्राप्त करते हैं।
3- सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर अच्छा प्रदर्शन कर पुरस्कृत भी होते हैं।
👉6. शिक्षक की उपलब्धियाँ :-
*नवाचार*
1- खेल - खेल में शिक्षा।
2- कला और क्राफ्ट के द्वारा शिक्षा।
3 - बाल संसद।
4 - गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण।
5 - सामूहिक सहभागिता।
👉7. उपलब्धियां/ पुरस्कार /सम्मान :-
1- ग्रेडेड लर्निग में B.R.P रूप में चयनित व प्रशस्ति पत्र प्राप्त किया।
2- राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रम *महिला सशक्तिकरण_* के सफल संचालन हेतु जिलाधिकारी जी द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।
3- माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बालिका सुरक्षा 'कवच ' कार्यक्रम हेतु जिलाधिकारी जी द्वारा प्रशस्ति - पत्र प्राप्त हुआ।
4- विधायक चायल जी द्वारा विद्यालय का कुशल संचालन हेतु प्रशस्ति - पत्र प्रदान किया गया।
5- अपर शिक्षा निदेशक कुमारी गायत्री जी द्वारा विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मान- पत्र प्राप्त हुआ।
6- मिशन शिक्षण संवाद के द्वारा आयोजित शैक्षिक उन्नयन कार्यशाला में जिलाधिकारी महोदय जी द्वारा प्रशस्ति- पत्र प्राप्त हुआ।
👉8. मिशन शिक्षण संवाद के लिए सन्देश :-
मिशन शिक्षण संवाद एक ऐसा मंच है जो शिक्षकों को एक सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है। इसके द्वारा विद्यालय में बच्चों का सर्वांगीण विकास व गुणात्मक शिक्षण की वृद्धि करने में सहायता मिलती है।मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि मिशन शिक्षण संवाद अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में सफल हो रहा है जिससे परिवर्तन अवश्य आयेगा।
👉9. शिक्षकों के लिए सन्देश :-
"कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।"
सभी शिक्षकों को सकारात्मक सोच के हमेशा शिक्षा के उत्थान हेतु प्रयासरत रहना चाहिए।
साभार:-
क्षमा सचान
प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर
चायल, कौशाम्बी
संकलन एवं सहयोग
दीपनारायण मिश्र
टीम मिशन शिक्षण संवाद
08/06/2020
नोट:- मिशन शिक्षण संवाद में सहयोग और सुझाव के लिए वाट्सअप नम्बर - 9458278429 पर लिखें।
मित्रों आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से जनपद - कौशाम्बी से अनमोल रत्न शिक्षिका बहन क्षमा सचान जी से परिचय करा रहे हैं। जिन्होंने अपनी सकारात्मक सोच और व्यवहार कुशलता से सदैव शिक्षा के उत्थान के लिए सतत प्रयास एवं संघर्ष करते हुए अपने विद्यालय को शिक्षण गतिविधियों एवं उपलब्धियों का तथा सामाजिक विश्वास का केन्द्र बना दिया है। जो हम सभी के लिए प्रेरक एवं अनुकरणीय प्रयास हैं।
आइये देखते हैं आपके द्वारा किए गये कुछ प्रेरक और अनुकरणीय प्रयासों को :-
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1- शिक्षक परिचय :-
क्षमा सचान (प्र०अ०)
प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर,
चायल, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश
वर्तमान विद्यालय में नियुक्ति तिथि - 06/08/13
प्रथम नियुक्ति तिथि :- 21/02/2009
👉1. भूतपूर्व विद्यालय की समस्या :- प्रथम नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय बंधवा रजबर, मंझनपुर कौशाम्बी जिले में सहायक अध्यापक के पद पर हुई। उस समय वहाँ पर बाउंड्रीवॉल नहीं थी, इसलिए विद्यालय में गांव वालों का बहुत हस्तक्षेप रहता था। लगभग एक वर्ष बाद ही मुझे विद्यालय का चार्ज संभालना पड़ा। तब मैंने विद्यालय की समस्या के समाधान हेतु विभाग से चहारदीवारी की मांग की और जल्द ही चहारदीवारी के बनाने की अनुमति मिल गई, किन्तु गांव के कुछ दबंग लोग दीवार नहीं बनाने दे रहे थे, पर मेरी अटल इच्छा शक्ति से तथा काफी संघर्ष के बाद वह चहारदीवारी मैंने निर्मित करवा ही ली। इसके लिए मेरी प्रशासनिक अधिकारियों ने भरपूर सहायता की।
👉2 वर्तमान विद्यालय की समस्याएं :-
1 - नामांकन कम होना।
2- बच्चों की नामांकन के सापेक्ष कम उपस्थिति।
3 - बच्चों का शैक्षिक स्तर कक्षा के अनुरूप न होना।
4 - अभिभावकों का विद्यालय के प्रति जुड़ाव की कमी।
5 - विद्यालय के कक्षा कक्ष का हवादार न होना। (दबंगों द्वारा कक्षा की खिड़की बंद करवाने के कारण)
👉3. समस्या का समाधान :-
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर तथा समय - समय पर बच्चों के द्वारा *स्कूल चलो अभियान रैली* निकलवा कर। घर -घर जाकर अभिभावकों से वार्ता करके विश्वास दिलाया कि हमारे विद्यालय में आपके बच्चों के लिए सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी दी जाती है। इससे हमारे विद्यालय का नामांकन 90 से बढ़कर 150 तक हो गया।
2 - बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार सिखाने का प्रयास किया गया, जब बच्चे अपनी रुचि से सीखना शुरू किया तो उन्हें अच्छा लगने लगा, जिससे कक्षा में बच्चों की उपस्थिति बढ़ गई।
3 - विद्यालय में शिक्षकों की कमी होने के कारण बहु-कक्षीय शिक्षण का उपयोग किया।
4 - बच्चों के अभिभावकों को विद्यालय बुलाकर अतिथि स्वरूप व्यवहार करने से उन्हें भी विद्यालय अच्छा लगने लगा और वे शिक्षकों से जुड़ने लगे।
5 - विद्यालय की एक कक्षा की खिड़की को कुछ दबंग लोगों ने ईटों द्वारा बंद करा दिया था, जिसे मैंने अपने विभाग व SDM को प्रार्थना -पत्र देकर वह खिड़की दोबारा खुलवा ली। यह बच्चों के लिए बहुत आवश्यक था।
👉4. विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियाँ:
1- वैसे मेरे विद्यालय को भूतपूर्व प्र०अ० ने काफी अच्छा बना रखा था। मैंने विद्यालय का और अधिक सौंदर्यीकरण कराकर प्रत्येक कक्षा में T.L.M बनवाए।
2 - कक्षाओं में बच्चों को लैपटॉप स्पीकर आदि से उनके शैक्षिक स्तर के अनुसार शिक्षा दी जाती है।
3 - बच्चों को कक्षा में कहानी, कविता, ज्ञानवर्धक बातों से व अब दीक्षा एप की मदद से भी बच्चों का सर्वांगीण विकास किया जाता है।
4 - विद्यालय में मेरे द्वारा व सहायक अध्यापकों की मदद से बच्चों के बैठने लिए डेस्क - बेंच का इंतजाम किया गया।
5 - मेरे द्वारा विद्यालय में ' *उदीशा* नामक वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन किया गया, जिसमे हमारे विद्यालय के बच्चों ने भरपूर अपने प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
6 - इस वार्षिकोत्सव में आयोजित कार्यक्रम को देखकर विधायक जी द्वारा विद्यालय को वाटर कूलर, प्रोजेक्टर व सोलर सिस्टम देने का वादा किया।
👉5. विद्यालय के बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियाँ :-
1- विद्यालय के बच्चों के द्वारा जिला स्तर कला प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त कर जिलाधिकारी महोदय से पुरस्कार प्राप्त किया।
2- ब्लॉक खेल रैली में बच्चों द्वारा उत्तम प्रदर्शन कर पुरस्कार प्राप्त करते हैं।
3- सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर अच्छा प्रदर्शन कर पुरस्कृत भी होते हैं।
👉6. शिक्षक की उपलब्धियाँ :-
*नवाचार*
1- खेल - खेल में शिक्षा।
2- कला और क्राफ्ट के द्वारा शिक्षा।
3 - बाल संसद।
4 - गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण।
5 - सामूहिक सहभागिता।
👉7. उपलब्धियां/ पुरस्कार /सम्मान :-
1- ग्रेडेड लर्निग में B.R.P रूप में चयनित व प्रशस्ति पत्र प्राप्त किया।
2- राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रम *महिला सशक्तिकरण_* के सफल संचालन हेतु जिलाधिकारी जी द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।
3- माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बालिका सुरक्षा 'कवच ' कार्यक्रम हेतु जिलाधिकारी जी द्वारा प्रशस्ति - पत्र प्राप्त हुआ।
4- विधायक चायल जी द्वारा विद्यालय का कुशल संचालन हेतु प्रशस्ति - पत्र प्रदान किया गया।
5- अपर शिक्षा निदेशक कुमारी गायत्री जी द्वारा विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मान- पत्र प्राप्त हुआ।
6- मिशन शिक्षण संवाद के द्वारा आयोजित शैक्षिक उन्नयन कार्यशाला में जिलाधिकारी महोदय जी द्वारा प्रशस्ति- पत्र प्राप्त हुआ।
👉8. मिशन शिक्षण संवाद के लिए सन्देश :-
मिशन शिक्षण संवाद एक ऐसा मंच है जो शिक्षकों को एक सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है। इसके द्वारा विद्यालय में बच्चों का सर्वांगीण विकास व गुणात्मक शिक्षण की वृद्धि करने में सहायता मिलती है।मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि मिशन शिक्षण संवाद अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में सफल हो रहा है जिससे परिवर्तन अवश्य आयेगा।
👉9. शिक्षकों के लिए सन्देश :-
"कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।"
सभी शिक्षकों को सकारात्मक सोच के हमेशा शिक्षा के उत्थान हेतु प्रयासरत रहना चाहिए।
साभार:-
क्षमा सचान
प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर
चायल, कौशाम्बी
संकलन एवं सहयोग
दीपनारायण मिश्र
टीम मिशन शिक्षण संवाद
08/06/2020
नोट:- मिशन शिक्षण संवाद में सहयोग और सुझाव के लिए वाट्सअप नम्बर - 9458278429 पर लिखें।



Congratulations
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