पर्यावरण

आओ हम पर्यावरण को बचाने का प्रण लेते हैं,
धरा पर पेड़ लगाकर, दुल्हन की तरह सजाते हैं।

रो - रोकर पेड़ आज कह रहे, मुझे मत काटो,
धरती की हरियाली को यूँ ना बर्बाद करो।

खूब पेड़ लगाकर पर्यावरण को बचाओ,
पेड़ काट धरा से पशु-पक्षियों  को मत भगाओ।

मत कुल्हाड़ी मार मेरे खून से धरती को भिगा दो,
बेटा समझ धरा पर एक पेड़ अपनी हाथ से लगा दो।

पेड़ों की कटाई से धरती हो जाएगी एक दिन बंजर,
चारों ओर होगा रेत, दिखाई देगा रेगिस्तान जैसा मंजर।

धरती पर जीवन के लिए जरुरी है स्वच्छ पर्यावरण,
पर्यावरण में हुई कमी, तो धरती पर मुश्किल होगी शरण।

दिन-ब-दिन बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग से है खतरे में जान,
अब तो पर्यावरण की रक्षा करने में ही है हमारी शान।

कार्बन डाई ऑक्साइड  लेकर पेड़ पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं,
पेड़-पौधों  पर पशु-पक्षी निवास करते हैं।

पर्यावरण असंतुलन से, मौसम भी बदल जाता है,
बारिश नहीं होती, बरसात निकल जाता है।

इतना सब कुछ होने पर भी इंसान क्यों नहीं समझता है,
हाथ मलता है, जब सब कुछ बर्बाद हो जाता है।

आओ हम पर्यावरण को बचाने का प्रण लें,
हर कोई अपने हाथ से एक वृक्ष लगा दें।

रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,          
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

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