प्रकृति की फरियाद
धरती करती, चीख-चीख पुकार।
मानव मत करो, मुझ पर प्रहार।।
गर काटोगे, मुझे हे! मानव।
तो त्राहि-त्राहि, करेगा जन-जन।।
कर न पाओगे, तब तुम कुछ।
बढ़ेगी ग्रीन हाउस और कार्बन।
ज्यों प्राकृतिक आपदाओं का कहर
गर गया, जो तुम पर बरस।।
धूप, पानी, ऑक्सीजन तुम्हें देते।
कार्बन-डाइ-ऑक्साइड ही हैं लेते।।
मानो अंजनी की यह पुकार।
लगाओ धरा पर पेड़ अपार।।
बच जाए मानव जीवन संसार।
लो शपथ प्राणवायु के साथ।
पेड़ों की हरियाली को बना आस।
न रखा है और न ही रखेंगे।
पेड़ों के विनाश से हम वास्ता।।
जो फिर भी लिया है अपना।
तो देंगे छोड़, हम वो रास्ता।।
रचनाकार
अंजनी अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेमरुआ,
विकास खण्ड-सरसौल,
जनपद-कानपुर नगर।
मानव मत करो, मुझ पर प्रहार।।
गर काटोगे, मुझे हे! मानव।
तो त्राहि-त्राहि, करेगा जन-जन।।
कर न पाओगे, तब तुम कुछ।
बढ़ेगी ग्रीन हाउस और कार्बन।
ज्यों प्राकृतिक आपदाओं का कहर
गर गया, जो तुम पर बरस।।
धूप, पानी, ऑक्सीजन तुम्हें देते।
कार्बन-डाइ-ऑक्साइड ही हैं लेते।।
मानो अंजनी की यह पुकार।
लगाओ धरा पर पेड़ अपार।।
बच जाए मानव जीवन संसार।
लो शपथ प्राणवायु के साथ।
पेड़ों की हरियाली को बना आस।
न रखा है और न ही रखेंगे।
पेड़ों के विनाश से हम वास्ता।।
जो फिर भी लिया है अपना।
तो देंगे छोड़, हम वो रास्ता।।
रचनाकार
अंजनी अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेमरुआ,
विकास खण्ड-सरसौल,
जनपद-कानपुर नगर।

Very nice 👌
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