शिक्षा उपवन

नए सुबह की दस्तक देता, हरा भरा ये उपवन है।
जीवों को आश्रय देता, ये प्यार भरा वो मधुबन है।।

भले गुम है माली आज यहाँ, फिर भी हरा-भरा सब है।
हर टहनी पर अंगूर यहाँ, पक्षी का खिलता बचपन है।।

हर पौधा है आश्रय इनका, हर फूल और पत्ती भोजन है।
शिक्षा के आँगन जैसा, भला और कहाँ अपनापन है।।

चिड़ियों के संग मोर यहाँ, कोयल की धुन मतवाली है।
केला, आम, बेल, गुलाब संग, आँवला की छटा निराली है।।

शहतूत शरबती लटक रहे, अनार की महक सुहानी है।
नींबू सतरंगी जामुन संग, मीठे बेर की अजब कहानी है।।

डाल कदम्ब की मोहित कर, अंजीर कराता गुंजन है।
हरसिंगार दुःख हरे सभी, नीम गिलोय से हरित मन है।।

एलोवेरा सभी को दे जीवन, हर तन मेहंदी से हर्षित है।
तुलसी शिक्षा के आँगन की, हर ताप को करती शीतल है।।

वटवृक्ष धरा पर उमड़ रहा, कुमकुम का भी आकर्षण है।
चहुँओर यहाँ पर हरियाली, नित सहज योग का दर्शन है।।

हर कदम-कदम पर पेड़ यहाँ, हर पौधे की अपनी गाथा है।
हर एक ने सींचा तन से है, हर एक से इसका नाता है।।

योग भरा एक उपवन है, संग शिक्षा का संस्कार भी है।
है स्वास्थ्यपरक पूरी दीक्षा और वसुधा की चिंता भी है।।

जब बचपन खिलता है वन में, तो रहता स्वस्थ जीवन है।
ये संकल्प दिव्य जब बनता है, फिर हर मन ही वृंदावन है।।

ये संकल्प..................................वृंदावन है।।

रचयिता
कृष्ण कुमार,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रामपुर की मड़ैया, 
विकास खण्ड-भाग्यनगर, 
जनपद-औरैया।

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