नया साल जब आता है

नया साल जब आता है
साल भर का अन्तराल बीत जाता है
बीता हुआ साल छोड़ जाता है कुछ बातें
जिनसे जुड़ी होती हैं खट्टी-मीठी "यादें"

कुछ रिश्ते नए बन जाते हैं
कुछ  टूट  पुराने  जाते  हैं
कभी पाकर भी रोता है 'दिल'
कभी  खोकर भी मुस्काता है

जीवन की उलझ पहेली में
एक पृष्ठ नया जुड़ जाता है
कुछ  छूट  पुराना जाता  है
संकल्प  रुठ  सा  जाता  है

गए  वर्ष  की  "गोधूलि"
कुछ  धुंधला सा दिखलाती है
कुछ 'विस्मृत' सा रह जाता है
नम  आँखें  भी  मुस्काती  हैं

हर शाम की ढलती बेला संग
एक  नया  सवेरा  आता  है
दिन बीत  'पुराने'  जाते  हैं
एक  "नया साल" जब आता है
एक  "नया साल" जब आता है !!

नववर्ष की शुभकामनाएँ

रचयिता
श्रीमती ममता जयंत,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय चौड़ा सहादतपुर, 
विकास खण्ड-बिसरख, 
जनपद-गौतमबुद्धनगर।

Comments

Total Pageviews